जाने, कहां जन्म हुआ था हनुमान जी का, मध्य प्रदेश के टिहरका या फिर आंजन में जन्में बजरंगबली

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लयुग में हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता में माने जाते हैं। वे भगवान श्रीराम के परमभक्त थे और सदैव ही भगवान श्रीराम के ध्यान में डूबे रहते हैं। रामभक्त बजरंगबली को सभी देवताओं का आर्शीवाद प्रा’ था, यह आर्शीवाद उन्हें उस समय प्राप्त हुआ था, जब उन्होंने सूर्य को फल समझ कर खाने का प्रयास किया था और बाल्यकाल में ही देवराज इंद्र के वज्र के प्रहार से मूर्छित हो गए थे।

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ऐसे परम बलवान हनुमान जी के जन्म स्थान को लेकर तमाम कथाएं हैं, ऐसे में अलग-अलग स्थानों में उनके जन्म से जुड़ी कथाएं कहने-सुनने को मिलती है। हम आपको श्रीराम भक्त हनुमान के जन्म से जुड़े स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं। हनुमान जी सेवक भी थे और राजदूत, नीतिज्ञ, विद्बान, रक्षक, वक्ता, गायक, नर्तक, बलवान और बुद्धिमान भी थे। शास्त्रीय संगीत के तीन आचार्यों में से हनुमान भी एक माने जाते हैं। अन्य दो थे शार्दूल और कहाल। संगीत पारिजात बजरंगबली के संगीत-सिद्धांत पर आधारित है।

मान्यता यह भी है कि सबसे पहले रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी शिला पर उन्होंने यह कथा लिखी थी। यह रामकथा वाल्मीकि जी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और हनुमन्नाटक के नाम से प्रसिद्ध है। इसके जुड़ा एक प्रसंग है, जिसे मैं आपकों बताने जा रहा हूं, जिसके अनुसार जब महर्षि वाल्मीकि को यह पता चला कि हनुमान जी ने उनसे पहले श्री राम कथा की रचना कर डाली है तो वे मायूस हो गए, तब हनुमान जी ने उस शिला को समूद्र में डाल दिया था, जिस पर राम कथा उन्होंने लिखी थी।

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अब आते हैं कि उनके जन्म स्थान पर, वैसे हनुमान के जन्म-स्थान के बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं का जा सकता है। मान्यताओं के अनुसार मध्यप्रदेश के आदिवादी मानते हैं कि हनुमानजी का जन्म रांची जिले के गुमला परमंडल के ग्राम अंजन में हुआ था। कर्नाटक के लोग मानते हैं कि हनुमानजी कर्नाटक में पैदा हुए थे। पंपा और किष्किंधा के ध्वंसावशेष अब भी हाम्पी में देखे जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश के टिहरका गांव में श्री हनुमान के जन्म लेकर कथाएं हैं, प्राचीन मंदिर भी हैं, श्रद्धालु आते हैं दर्शन-पूजन को

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित टिहरका गांव है। त्रेता युग के किस्से-कहानियों के अनुसार यहां हनुमानजी के जन्म से जुड़ी तमाम कथाएं बताई जाती हैं। इस गांव में स्थित मंदिरों में पूजा करने के लिए भक्त भी इसी मान्यता को मानते हुए आते हैं कि श्री हनुमान जी का यह जन्म स्थल है। वास्तव में टिहरका गांव में बजरंगबली हनुमान का एक अतिप्राचीन मंदिर है, इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान हनुमानजी का जन्म इसी गांव में हुआ था। इसी पावन पवित्र धरा पर चैत्र शुक्ल पक्ष के दिन मंगलवार को मारुतिनंदन हनुमान का जन्म हुआ था।

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अंजनी माता अपने पति केशरी के साथ सुमेरु पर्वत पर निवास करती थीं। जब कई वर्षों तक माता अंजनी को संतान प्राप्त नहीं हुई तो मतंग ऋषि के कहने पर टिहरका गांव के पर्वत पर करीब सात हजार सालों तक निर्जल तप किया, तब से बिल्व की आकृति का पर्वत यहां अडिग खड़ा है।

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इसी पर्वत के नीचे भगवान महादेव का धाम भी है। यहां माता अंजनी तपस्या करके पूर्व दिशा में स्थित आकाश गंगा में स्नान करती थीं। वे दोनों कुंड इस गांव में आज भी मौजूद हैं, जिनका पानी कभी नहीं सूखता है। चाहे गर्मी का मौसम हो, या फिर सर्दी का , यह कुंड सदैव ही जल से भरा रहता है।

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इस गांव में बजरंगबली हनुमानजी के जन्म को लेकर एक और किवदंति भी है। जिसके अनुसार जिस यज्ञ के माध्यम से भगवान राम का जन्म हुआ था, जिस यज्ञ को राजा दशरथ ने करवाया था, उसी यज्ञ के प्रसाद से हनुमान जी का जन्म भी हुआ था। अयोध्या के परम प्रतापी राजा दशरथ ने जब पुत्र की कामना से जब यज्ञ कराया था, तब यज्ञ के बाद ऋषि वशिष्ठ ने तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को खीर का प्रसाद दिया था।

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इस बीच कैकई के हाथ से प्रसाद का कुछ अंश छीनकर एक चील ले कर भाग गयी थी। रास्ते में तूफान से उस चील के हाथ से प्रसाद गिर गया था। उसी समय पवन देव ने पर्वत पर तपस्या कर रही अंजनी माता के हाथ पर वह प्रसाद डाल दिया था, जैसे ही वह प्रसाद माता ने ग्रहण किया था, हनुमानजी गर्भ में आ गए और इस तरह हनुमानजी ने टिहरका गांव में जन्म लिया था। टिहरका गांव के इस सिद्ध धाम में बाल हनुमान के साथ माता अंजना की पांच मूर्तियां भी विराजमान है।

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मान्यता यह भी हैं कि हनुमानजी के जन्म के बाद यहां शेष नाग उनके दर्शन के लिए आए थे। यहां बाल हनुमान और शेष नाग की मूर्ति भी दर्शन देती हैं। यहां को लेकर एक धार्मिक आस्था है कि संकटों के बादल जब छाने लगें और दुख जब पहरा देने लगे तो मनुष्य को इस धाम में सच्चे मन से प्रार्थना करनी चाहिए। इसे सभी कष्ट व संकट हनुमान जी हर लेते हैं।

आंजन गांव में जन्म से जुड़ी कथा

वैसे तो रामभक्त हनुमान के बहुत सारे मंदिर हैं। तमाम मान्यताएं हैं, उनमें से एक मान्यता के अनुसार, उनका जन्म झारखंड के गुमला जिले के उत्तरी क्षेत्र में हुआ था। यहां पर एक गुफा को उनका जन्म स्थान माना जाता है। यहां को लेकर मान्यता है कि कलयुग में ये गुफा अपने आप बंद हो गई है और इसके पीछे माता अंजना गुस्सा माना गया है।

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बजरंग बली की मां अंजना के नाम पर ही इस गांव का नाम आंजन पड़ा है। गुमला जिला से लगभग 22 किमी की दूरी पर यह गांव स्थित है।ं यह एकमात्र ऐसा मंदिर हैं, जहां पर हनुमान अपनी माता की गोद में बैठे हुए दिखाई देते हैं।

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माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म गुमला जिले के आंजनधाम में स्थित एक पहाड़ी की गुफा में हुआ था। इस गुफा का द्बार कलयुग में अपने आप बंद हो गया है। कहा जाता है कि यहां पर बलियां दी जा रही थी, इससे माता अंजनी लोगों पर कुपित हो गईं और उन्होंने ये गुफा बंद कर दी थी। ये गुफा आज भी आंजन गांव में स्थित हैं।

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यहां आंजन में एक मंदिर भी स्थित है। हनुमान भक्तों ने इसकी स्थापना 1953 में की थी। मंदिर में स्थापित प्रतिमा में हनुमान जी माता अंजनी की गोद में बैठे हुए हैं। यहां एक पंपापुर नामक सरोवर है। जिसके विषय में कहा जाता है कि इस सरोवर में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने स्नान किया था।

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