अंगों के फड़कने से जानिए, शकुन-अपशकुन

0
344

अंगों के फड़कने पर हम चर्चा तो करते हैं, बहुतेरें इसे मानते भी है, बहुतेरें अंधविश्वास मानते हैं। हमारी व्यक्तिगत विचारधारा कुछ भी हो, इसे माने या न माने, लेकिन हकीकत यह है कि प्राचीन काल से इस विद्या पर लोग विश्वास करते आ रहे हैं।

ADVT

मुख्य रूप जाना अंगों के फड़कने के बारे में जाना जाए तो यह दाहिना अंग पुरुषों का और बाया अंग महिलाओं का फड़कना शुभ माना जाता है।

अंगों का फड़कना

1- सिर का फड़कना मुख्य रूप से लाभदायक रहता है। यही क्रिया सिर के पीछे हो तो व्यक्ति की इच्छाएं पूर्ण होती है।
2- शकुन के रूप में गरदन की फड़कन अक्सर शुभ ही रहती है, कभी-कभी स्त्री का सम्पर्क भी पाया गया है।
3- माथ्ो का सारा हिस्सा फड़के तो परिश्रम करना पड़ेगा। यही फड़कन यदि माथ्ो के दाहिने तरफ हो तो यात्रा में कष्ट और बायी तरफ हो तो प्रसन्नता प्राप्त होती है।

यह भी पढ़ें- विपत्ति नाश, यात्रा में शुभता और सर्व शुभता प्राप्ति के लिए क्या करें, असरदार उपाय जानिये

4- पगथली यानी तलुआ पर खुजली हो तो यात्रा होती है।
5- किसी व्यक्ति विश्ोष के चलने से धप्प-धप्प की पगध्वनि होती है तो अक्सर ऐसे व्यक्ति शुभ नहीं होते हैं।
6- दाहिने पांव की पहली और आखिरी अंगुली का फड़कना शुभ नहीं माना गया है।
7- बायें पांव की अंगुलियां फड़कें तो शुभ ही रहता है।
8- बाईं आंख के नीचे फड़कन हो तो व्यर्थ ही व्यय होता है।
9- दाहिनी आंख के नी फड़कन हो तो सम्मान आदि की प्राप्ति होती है।
1०- दांत का उपरी भाग फड़क कर प्रसन्नता की अनुभूति कराता है।
11- किसी की पिंडली फड़के तो शत्रु भय कराती है।
12- पांव का अंगूठा फड़के तो शुभ होता है।
13- यदि हाथ का दाहिना अंगूठा फड़के तो शुभ खबर मिलती है। बायां अंगूठा फड़के तो हानि कराता है।
14- केवल बायां घुटना का फड़कना ही शुभप्रद होता है।

यह भी पढ़ें –भगवती दुर्गा की उत्पत्ति की रहस्य कथा और नव दुर्गा के अनुपम स्वरूप

15- टखना केवल बायां पांव का ही फड़कना शुभाशुभ होता है।
16- दाहिना पांव फड़के तो कष्टों का अंत होता हे, बायंे पांव की फड़कन इच्छित यात्रा कराती है।
17- नितम्ब का फड़कना प्रत्येक स्थिति में लाभ प्रदान करता है।
18- बायीं जांघ फड़के तो शुभ होता है, दाहिनी जांघ फड़ककर शत्रु पक्ष को बेचैन कराती है।
19- हृदय का फड़कना शुभ नहीं माना जाता है।
2०- छाती के मध्य भाग ही फड़कने की दृष्टि से शुभ रहता है।
21- यदि किसी व्यक्ति की नाभि फड़के तो विनाश होता है।
22- किसी भी मनुष्य का गुप्तांग यदि फड़कता है तो किसी लम्बी यात्रा पर जाना पड़ता है। सम्भवत: विदेश यात्रा भी हो सकती है।
23- पेट का फड़कना शुभ-अशुभ दोनों ही प्रदान करता है।
24- पूरी कमर फड़के तो यात्रा सम्भावित होगी।
25- कमर अगर दाहिने तरफ से फड़के तो अशुभ ही रहता है, जबकि बायीं तरफ से फड़के तो शुभता प्रदान करती है।
26- पीठ का फड़कना अशुभ ही घटित होता है।
27- दायीं हथ्ोली की फड़कन लालच प्रदान करती है, जिसके कारण लाभ प्राप्त होता है।
28- बायीं हथ्ोली की फड़कन हानि कराती है।
29- जिसका दायां हाथ फड़के समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, जबकि बायां हाथ फड़कना अक्सर विरह ही कराता है।
3०- अगर दाहिनी बाह फड़के तो शुभता मिलती है, जबकि बांह के फड़कने से अफसोस ही होता है।
31- दाहिनी बगल फड़कने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, जबकि बायीं बगल के फड़कने से ऐश्वर्य की हानि होती है।
32- दाहिने कंध्ो की फड़फड़ाहट परेशानी पैदा करती है, वहीं बायें कंध्ो की फड़फड़ाहट शत्रु को नीचा दिखाती है। दोनों कंध्ो फड़के तो झगड़े की आशंका होती है।
33- ठोड़ी का फड़कना अक्सर शुभ ही माना गया है।
34- होंठ का फड़कना भी अक्सर शुभ ही माना गया है।
35- जीभ का फड़कना व्यर्थ की कलह कराता है।
36- प्रत्येक स्थिति में मुख का फड़कना अक्सर शुभ ही रहता है।
37- नाक का फड़कना अक्सर शुभ ही रहता है।
38- जिसका दाहिना गाल फड़के तो लाभ होता है, लेकिन बायां गाल फड़के तो व्यय कराता है। यदि पत्नी गर्भवती है तो गाल मध्य में फड़के तो कन्या का जन्म देखने-सुनने में आया है।
39- दाहिनी पलक खुशी और बायीं पलक दुख और कष्ट ही देती है।
4०- अक्सर दाहिनी आंख का फड़कना उत्तम माना गया है, जबकि बायीं बायीं आंख का फड़कना स्त्री से दुख आदि की सूचना देता है।
41- किसी मनुष्य की जब भवें फड़कती है तो उसे प्रेम की प्राप्ति होती है।
42- दाहिने कान का फड़कना जातक की प्रमोशन आदि कराता है, जबकि बायां कान फड़के तो खिन्नता होती है।

यह भी पढ़ें –पवित्र मन से करना चाहिए दुर्गा शप्तशती का पाठ

यह भी पढ़ें –नवदुर्गा के स्वरूप साधक के मन में करते हैं चेतना का संचार

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here