जानिए, शंख की महिमा, होगी महालक्ष्मी की कृपा

0
399

हिंदू धर्म में शंख को अति पावन माना जाता है। पूजा में इनका विधान है। इसका विश्ोष महत्व है, शंख की ध्वनि से मन में एक अद्भुत आस्तिकता, उर्जा, आध्यात्मिकता और पवित्रता का संचार होता है। इसका प्रयोग मंगलकारी और शुभता प्रदान करने वाला माना जाता है। पूर्वकाल में युद्ध से पूर्व भी इनका प्रयोग होता था। वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार इसकी ध्वनि से अनेकानेक कीटाड़ू नष्ट हो जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी शंख लाभकारी है, शंख बजाने से फेफड़ों के लिए अच्छा व्यायाम होता है। इसे बजाने से श्वास, कास, दमा आदि रोगों में लाभ होता है। शंख समुद्र से पाए जाते है, इनके आकार-प्रकार के अनुसार इन्हें नाम दिए गए हैं। उदाहरण के रूप में जाने, जैसे दक्षिणावर्ती शंख, वामवर्ती शंख, पंजा शंख, एलीफेंटा शंख, हार्समूली शंख, मोती शंख, मूली शंख, काऊ हेंड शंख आदि। इनमें भी शंख के तीन प्रकार होते है, एक बजने वाले शंख, दक्षिणावर्ती शंख व शोपीस के रूप में प्रयोग किया जाता है। शंख की उत्पत्ति को लेकर पौराणिक गाथाएं है। एक प्रसंग के अनुसार शूलपाणि भगवान शंकर का महासंहारक त्रिशूल जब दानवीर शंखचूड़ पर गिरा तो उसके तेज से वह वहीं भस्म हो गया। इस पर भगवान शंकर प्रसन्न हुए और उसकी हXियों को उन्होंने समुद्र में फेंक दिया। माना जाता है कि दानवीर शंखचूड़ की हXियों से समुद्र में विभिन्न तरह के शंखों की उत्पत्ति हुई है

ADVT

वामवर्ती शंख
वामवर्ती शंख बहुतायत में पाए जाते हैं। वामवर्ती शंख का पेट बाँईं ओर खुलता है। ये अनेक आकार-प्रकार के होते है। इनका मुख ऊपर की ओर से कटा होता है और यहीं बजने वाले शंख होत है। ये शंख अपने प्राकृतिक रूप में भी मिलते है। वामवर्ती शंख द्बारिका और रामेश्वरम के सर्वोत्तम माने जाते है।

दक्षिणावर्ती शंख
दक्षिणवर्ती शंख को लक्ष्मी शंख या जमाना शंख भी कहा जाता है। यह बहुत कम पाए जाते हैं। दक्षिणावर्ती शंख विभिन्न आकार प्रकार के होते है, ये शंख बजाने के काम नहीं आते हैं, बल्कि इनकी पूजा की जाती है और इनमें जल भर कर सूर्य को अध्र्य दिया जाता है। दक्षिणावर्ती शंख का माता लक्ष्मी का सहोदर और भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख की पूजा होती है, उस घर में माता लक्ष्मी की सदा कृपा बनी रहती है।
दक्षिणावर्ती शंख की प्रतिष्ठा विधि- सबसे पहले शंख को कच्चे दूध से धोकर इसे स्वच्छ या गंगा जल से धो लें। फिर साफ कपड़े से पोंछ कर सुखा लें। फिर चंदन, पुष्प, धूप, दीप, आदि से इनकी पूजा करे और इसे लाल रंग के रेशमी कपड़े में लपेट कर पूजा वाले स्थान पर प्रतिष्ठित करें। वस्त्र के स्थान पर इसे चाँदी में भी मंडवाकर रखने का विधान है। प्रति पुष्प, धूप और पुष्प आदि से इसकी पूजा करे तो माता लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है।

शोपीस शंख
इनमें एलीफेंन शंख, काऊहैंड शंख, हार्समूली शंख, पंजा शंख, मूली शंख आदि हैं। इनका इस्तेमाल स्थान को सुंदरता प्रदान करने के लिए किया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here