नशे से मुक्ति चाहिए तो करें गाय के दूध का सेवन, गाय के दूध में होता है स्वर्णाक्षर

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गाय को हिंदू धर्म में जो स्थान प्राप्त है, उसकी तुलना अन्यत्र कहीं नहीं की जा सकती है। वैदिक काल से गाय के पूजन की परम्परा है। धार्मिक रूप से तो गाय को महत्व दिया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाय हमे निरोगी रखने में कितनी प्रभावशाली है। गाय की रीढ़ में सूर्यकेतु नाम नाड़ी होती है, जो कि सूर्य के प्रकाश से जागृत होती है। यह नाड़ी सूर्य की किरणों के प्रभाव में आकर रक्त में स्वर्णाक्षर बनाती है। यहीं स्वर्णाक्षर ही गाय के दूध की सबसे बड़ी विश्ोषता है। इसके प्रभाव से मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे विष का प्रभाव भी कम होता है।

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गाय के दूध में मिलने वाला मां के दूध के अलावा कहीं अन्यत्र नहीं मिलता है। शायद यह भी एक वजह होगी, जिसकी वजह से गाय को सनानत संस्कृति में मां का दर्जा प्राप्त है। गाय के दूध में स्वर्ण कैरोटीन पदार्थ होता है, उससे मनुष्य की नेत्रों की ज्योति बढ़ती है। इसके अलावा गाय के दूध में सेरीब्रामाइड तत्व भी पाया जाता है, जिससे बुद्धिबल बढ़ता है। एक और विश्ोषता गाय के दूध के महत्व को बढ़ाने वाली है, वह यह है कि गाय के दूध में ट्रिप्टोफैन सबसे अधिक पाया ज्याता है। इसके प्रभाव मनोस्थिति पर सकारात्मक रहता है। कैंसर रोग के उपचार में भी गाय का दूध सहायक होता है, इसमें जो कंजूगेटिड लिनोलिक एसिड पाया जाता है, वह कैंसररोधी होता है।

गाय के दूध में अमीनो एसिड पर्याप्त मात्रा में होता है, जिससे कोशिकाएं ठीक होती है। दूध में स्ट्रोन्शियम पाया जाता है, इसे दवाओं प्रयोग किया जाता हे, इससे प्रभाव से पुरानी चोटे ठीक होती हैं। स्ट्रोनिशयम के प्रभाव से रेडिया विकरण का प्रभाव भी कम होता है। गाय के घी में सर्वाधिक प्राणवायु निर्माणक रसायन रहते है। एक चम्मच घी आहूति देने से भारी मात्रा में प्राणवायु बनती है।

दूध के अधिक सेवन से मूत्र अधिक होता है, जिसके कारण पथरी, स्त्रियों के गर्भाशय और मासिक धर्म की कमी दूर होती है। प्रमेय व मिरगी में भी लाभकारी होता है। गाय के दूध की छाछ के प्रयोग से नशा करने की इच्छा कम होती है, कुछ मिलाकर कहें कि इसका शरीर व मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। रूस के वैज्ञानिकों ने गोघृत पर शोध किए है, जिसमें यह तथ्य सामने आया है कि गाय के धी से आहूति देने से आणुविक विकरण, वैक्टीरिया व कीटाड़ुओं का प्रभाव कम होता है। इसके अलावा गाय के घी को चावल के साथ मिलाकर आहूति देने से ईथीली ऑक्साइड, प्रोपलीन ऑक्साइड व फॉर्मल्डिहाइड बनती है, जो कि लाभकारी होती है।

गोघृत पर्यावरण को शुद्ध करता है। हृदय विकार दूर होते हैं। नेचर पत्रिका के अनुसार गाय के दूध के दही में एक ऐसा वैक्टीरिया पाया है, जो एड्स की रोगथाम में भी मददगार है। वैसे तो गाय के दूध के गुण असंख्य है, लेकिन एक ऐसा गुण है, जिससे आप तेजस्वी संतति प्राप्त होती है, इसके लिए गर्भवती को चांदी के कटोरे में जमायी हुई दही का सेवन करना होता है।

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