नवरात्रि में सिद्धि: उपद्रव नाशक,विद्या वृद्धि, पितृ दोष व इन्टरव्यू में सफलता के प्रयोग

0
68

बुद्धि रूप से सबके हृदय में विराजमान रहने वाली और स्वर्ग व मोक्ष प्रदान करने वाली नारायणी देवी को जब-जब सच्चे हृदय से नमन किया जाता है। उनका पूजन अर्चन किया जाता है, तो वह भक्त पर कृपा करती है, उसके कष्टों को हरती हैं। उसे अर्थ और मोक्ष प्रदान करती हैं। ऐसी जगदम्बा का पूजन यदि नवरात्रि के समय में किया जाए तो भक्त पर वह सहज ही प्रसन्न हो जाती है। उसकी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। नवरात्रि का समय साधना की दृष्टि से उत्तम माना जाता है। इस अवधि में भगवती के पूजन में कुछ सावधानियां भी बरतनी चाहिए। कुछ साधनाआंे का उल्लेख भी हम आपके लिए करने जा रहे हैं, जिनके माध्यम से आप आत्मकल्याण प्राप्त कर सकते हैं। वह प्रसन्न होने पर भक्त के संकटों को हर कर उसकी बाधाएं दूर करती है और धन- धान्य से उसके भंडारे भर देती है।

ADVT

पूजन में बरते ये सावधानियां

1. एक व्यक्ति कई प्रयोग कर सकता है, लेकिन एक प्रयोग करने के बाद दूसरा प्रयोग करने से पूर्व हाथ मंंह पैर आदि को धोना आवश्यक है, यदि संभव हो तो स्नान करें।
2. साधना प्रयोग करने से पूर्व प्रत्येक बार (एक साधना प्रयोग पूरा करने के बाद जब दूसरा प्रयोग आरम्भ करें) हाथ मे जल लेकर अपना नाम, पिता का नाम, गोत्र, शहर, देश का नाम आदि उच्चारण करें। तत्पश्चात जल अपने ऊपर छिड़कें।
3. प्रयोग करने से पूर्व आवश्यक सामग्री एकत्रित कर लें।
4. साधना प्रयोग के लिए कंबल अथवा कुशासन का उपयोग करें।
5. साधना काल में पवित्रता एवम ब्रह्मïचर्य का पालन करें।
6. नवरात्रि काल में बाल न कटवायें।

उक्त सावधानियों का पालन करते हुए साधना करने से सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। कार्यसिद्घि के लिए नवरात्रि में किये जाने वाले ये सिद्घ प्रयोग जो प्राणियों की अभिलाषा पूर्ण कर परम सुख प्रदान करते है।

उपद्रव नाशक प्रयोग

रात्रि के सयम स्नान करके साफ स्वच्छ धोती धारण करें। यदि संभव हो तो पीताम्बर का प्रयोग करें तत्पश्चात हनुमान जी का यंत्र चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें और यंत्र पर सिंदूर का तिलक करें तथा कुमकुम से हुं हनुमत नम:लिखें। गुण का भोग लगाकर मूंगे की माला पांच माला नित्य प्रति मंत्र करें-

ऊँ घंटाकर्णो महावीर सर्वउपद्रव नाशय कुरु-कुरु स्वाहा।।

 

विद्या वृद्धि प्रयोग

पढऩे वाले बालक यह प्रयोग करके परीक्षा से पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकते हैं-
स्थापना के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके चौकी पर सफेद वस्त्र बिछायें तत्पश्चात थाली में केशर से ह्रीं लिखकर सरस्वती कवच स्थापित करके केशर का तिलक करें तथा स्फटिक की माला से 11 माला प्रतिदिन पाठ करें-

ऊँ मनों श्री वद वद वाग्यादिनी बुद्घि बध्र्दय
ऊँ ह्रीं नम: स्वाहा।।

 

पितृ दोष निवारण

घर की शान्ति नष्टï हो जाने पर निम्न मंत्र का पाठ करें, शांति पूर्ववत स्थापित हो जायेगी।

ऊँ श्री सर्वपितृ निवारणय क्लेश दन दन
सुख शांति देहि देहि फट्टï स्वाहा॥

 

नौकरी हेतु इन्टरव्यू में सफलता प्राप्ति के लिए

पूर्वोक्त विधि से स्फटिक की माला से प्रतिदिन 108 बार नीचे लिखे मंत्र का पाठ करें-

ऊँ ह्रीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्घि करि-करि स्वाहा।
उपरोक्त मंत्र का पाठ नौ दिन तक करें।

यह भी पढ़ें –भगवती दुर्गा की उत्पत्ति की रहस्य कथा और नव दुर्गा के अनुपम स्वरूप

यह भी पढ़ें –पवित्र मन से करना चाहिए दुर्गा शप्तशती का पाठ

यह भी पढ़ें –नवदुर्गा के स्वरूप साधक के मन में करते हैं चेतना का संचार

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here