चराचर जगत के पथ प्रदर्शक हैं पुराण

जानिये, पुराण क्या हैं?

वेद में निहित गूढ़ ज्ञान को समझना कभी आसान नहीं था, इसे सही अर्थो में समझा जाए, इसके लिए पुराणों की रचना की गई और इसे रोचक देव कथाओं के माध्यम से समझा जा सके। ब्रह्मर्षियों के प्रयास से संकलित रोचक कथाएं देव लीलाओं पर आधारित है, जिसमें देव का महत्व समाहित है, इन्हीं देव कथाओं के संकलन को वास्तव में पुराण कहा जाता है।

कथाओं के माध्यम से वेद के ज्ञान की जानकारियां देने की प्रथा चली और कालांतर में पुराणों के माध्यम से ज्ञान के सार तत्व को समझना कुछ आसान हो गया। वास्तव में पुराण ज्ञानयुक्त कहानियों का एक विशाल संग्रह है, पुराणों को वर्तमान में रचित विज्ञान कथाओं के जैसा ही समझा जा सकता है। चूंकि पुराणों में वेदों को सहजभाव में समझाने का प्रयास किया गया है और इस दृष्टि से देखा जाए तो ऋषियों का यह प्रयास काफी सफल भी रहा है, आज के दौर में वेदों को सही अर्थों में समझ सकें, शायद इतनी सामथ्र्य कम ही है या यूं कहें कि नहीं के बराबर है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी, पुराणों में न सिर्फ भूतकाल को समझाने का प्रयास किया गया है, बल्कि वर्तमान काल का भी चित्रण है, कुछ प्रमुख पुराणों में तो भविष्य में होने वाली घटनाओं के लिए इंगित भी किया गया है।

यह भी बताया गया है कि कलयुग में अधर्म किस तरह से बलवान हो जाएगा। जैसे-जैसे कलयुग अपने चरम पर पहुंचेगा, वैसे- वैसे धर्म का पालन करने वाले प्रभावहीन व सीमित हो जाएंगे, इसलिए भी पुराणों का महत्व आज के दौर में काफी बढ़ गया है। इसी दृष्टि से इस वेब पोर्टल को बनाया गया है। वास्तव में पुराण का अर्थ है इतिहास का सार और निचोड़।

18 पुराणों का संकलन महर्षि वेद व्यास ने किया है। ब्रह्मा, विष्णु व महेश मुख्य देव हैं, त्रिमूर्ति के प्रत्येक देव को छह-छह पुराण समर्पित किए गए हैं। पुराणों में इन देवों की महिमा का बखान है।

ये जो 18 पुराण हैं इनमें –

1- ब्रह्म पुराण, 2- पद्म पुराण, 3- विष्णु पुराण, 4- शिव पुराण-वायु पुराण, 5- श्रीमद्भगवद पुराण- देवी भाागवत पुराण, 6- नारद पुराण, 7- मार्कंडेय पुराण, 8- अग्नि पुराण, 9- भविष्य पुराण, 1०- ब्रह्म वैवर्त पुराण, 11- लिंग पुराण, 12- वाराह पुराण, 13- स्कंद पुराण, 14- वामन पुराण, 15- कुर्म पुराण, 16- मत्स्य पुराण, 17- गरुण पुराण और 18- ब्रह्मांड पुराण।

इनके अलावा देवी भागवत के 18 उप पुराण का उल्लेख भी किया गया है, 1- गणेश पुराण, 2- नरसिंह पुराण, 3- कल्कि पुराण, 4- एकाम्र पुराण, 5- कपिल पुराण, 6- दत्त पुराण, 7- श्री विष्णुधर्मोत्तर पुराण, 8- मुद्गल पुराण, 9- सनत्कुमार पुराण ,1०- शिव धर्म पुराण, 11- आचार्य पुराण, 12- मानव पुराण, 13- उश्ना पुराण, 14- वरुण पुराण, 15- कालिका पुराण, 16- महेश्वर पुराण,17-साम्ब पुराण और 18- सौर पुराण।

इसके इतर अन्य भी हैं, जिन्हें पुराणों की श्रेणी में रखा जाता है, इनमें 1-पाराशर पुराण, 2- मरीच पुराण, 3- भार्गव पुराण, 4- हरिवंश सौर पुराण और 5- प्रज्ञा पुराण। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पशुपति पुराण नाम से 11 उप पुराण या अति पुराण भी है, जिन्हें धर्म में मान्यता मिली हुई है।

अगर हम पुराणों की बात करते हैं, तो यह बात जाननी जरूरी हो जाती है कि गरुण पुराण की भी अपनी विशेष महत्ता है, ग्रंथ में मृत्यु के बाद की घटनाओं और 84 लाख योनियों के नरक स्वरूपी जीवन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। लोग इसे पढ़ने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि इसे मृत्यु के बाद ही पढ़वाया जाता है। इस पुराण में गर्भ में स्थित भ्रूण के वैज्ञानिक पहलुओं को सांकेतिक रूप से भी बताया गया है।

यह ग्रंथ उस वक्त लिखा गया, जब आज के दौर के वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया को विज्ञान के इन पहलुओं की शायद जानकारी नहीं थी, जो कि निश्चित तौर पर आश्वर्य में डालने वाला है। वहीं भागवत-विष्णु पुराण में भगवान विष्णु की महिमा को बताया गया है, जिसके माध्यम से भविष्य की ओर भी संकेत किया गया है। शिव पुराण में आदि पुरुष और योगीराज भगवान शंकर की लीलाओं को विस्तार से बताकर वेद के सार को समझाने का प्रयास किया गया है।

जीव धर्म क्या है? समझाने का प्रयास किया गया है। इसके अलावा कल्कि पुराण में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार का उल्लेख है, जो कि कलयुग के अंत में अवतरित होंगे, जो कि अधर्मियों का नाश कर धर्म की स्थापना कर सत्युग की शुरुआत करेंगे।

-भृगु नागर

सनातन लेख

पुराण पीडीऍफ़ एवं ऑडियो लिंक

पुराण (संस्कृत)
पुराण (हिंदी) – 

Upapuranas

ऐत्रेय ब्राह्मण

 

पुराण (ऑडियो)

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