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किसानों ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र

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मुंबई। किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की राजधानी में जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक भी है और भर्त्सना करने योग्य भी। देश की राजधानी जिस तरह से गणतंत्र दिवस के मौके पर गणतांत्रिक को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया, उसने व्यवस्था पर तो सवाल खड़े किए ही हैं, साथ ही आंदोलनकारी कटघरे में खड़े हो गए। आंदोलन को लेकर किसान नेता बेशक पल्ला झाड़ रहे हो, लेकिन हिंसा के जो दृश्य देशभर ने देखे हैं, वह ना सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण हैं, दुखद है, बल्कि आंदोलन में अराजक तत्वों के शामिल होने का भी संकेत कर रहा है। हो सकता है किसान नेताओं को इन अराजक तत्वों के बारे में जानकारी ना हो, लेकिन घटना को सिरे से नकार ना और आत्ममंथन ना करना, आंदोलनकारी नेताओं के लिए और भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण होगा। केंद्र सरकार को भी इस विषय को लेकर आत्ममंथन करने की आवश्यकता है, क्योंकि अब इस आंदोलन को लेकर जल्द ही केंद्र सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो यह राष्ट्र हित में नहीं होगा। केंद्र सरकार को भी और किसानों को भी दोनों को इस आंदोलन को लेकर अब जल्द से जल्द कोई निर्णय लेने की आवश्यकता है। बहरहाल किसान आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसा के मामले में कुछ भी हो, केंद्र सरकार और आंदोलनकारी कुछ भी निर्णय ले लेकिन वकालत की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में स्वत:संज्ञान लेेने का अनुरोध किया है। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान लाल किला में हुई हिंसा को लेकर वकालत की पढ़ाई कर रहे मुंबई के एक छात्र ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे को पत्र लिखा है और उनसे इस मामले में स्वत:संज्ञान लेेने की अपील की है।
मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में मुंबई विश्वविद्यालय के छात्र आशीष राय ने दावा किया किया है कि ट्रैक्टर परेड के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पात मचाया गया है।
श्री राय ने पत्र में कहा है कि इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुंचायी गयी। यह एक शर्मनाक घटना है। इस घटना से पूरे देश की भावनाएँ आहत हुयी है क्योंकि इस दौरान देश के संविधान के साथ ही राष्ट्र ध्वज का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां भारतीय नागरिकों की संवैधानिक भावनाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।”

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