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40%कोरोना मरीजों में एंटीबॉडी बनने की दर घटी

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मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। बेहरुपिया कोरोना वायरस लगातार डॉक्टरों की चिंता बढ़ा रहा है। अब एक और चौकाने वाला तथ्य सामने आया है।

manoj shrivastav

कोरोना को हरा चुके लोगों में एंटीबॉडी के गायब होने का प्रतिशत बढ़ गया है। अभी तक 30 फीसदी कोरोना विजेताओं में एंटीबॉडी नहीं बन रही थी। यह प्रतिशत बढ़कर 40 पहुंच गया है। लखनऊ में अब तक 64 हजार से ज्यादा लोग कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें तकरीबन 60 हजार मरीज वायरस को हरा चुके हैं। 889 संक्रमित दम तोड़ चुके हैं। गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा थेरेपी की जा रही है। लोहिया, केजीएमयू और पीजीआई कोरोना विजेता से प्लाज्मा निकालने के लिए अधिकृत हैं। कोरोना विजेता से लिया प्लाज्मा गंभीर मरीजों को चढ़ाया जाता है। ताकि मरीज में कोरोनाएंटीबॉडी तैयार हो सके। केजीएमयू के ब्लड एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चन्द्रा के मुताबिक प्लाज्मा दान के लिए बड़ी संख्या में विजेता आ रहे हैं। जांच के बाद प्लाज्मा लेने की प्रक्रिया की जा रही है। पहले जांच में 30 प्रतिशत कोरोना विजेताओं में एंटीबॉडी गायब मिल रही थी। अब करीब 40 प्रतिशत लोगों में कोरोना की एंटीबॉडी नहीं मिल रही हैं। ऐसा क्यों हो रहा है इसका पुख्ता कारण अभी पता नहीं चल पा रहा है? उन्होंने बताया कि अब तक 300 कोरोना विजेता प्लाज्मा दान कर चुके हैं। 125 से ज्यादा कोरोना विजेताओं की जांच में एंटीबॉडी गायब मिली। पीजीआई ब्लड बैंक के डॉ. अनुपम वर्मा के मुताबिक बिना लक्षण वालों में कम या फिर नहीं एंटीबॉडी बनने की आशंका है। जिन मरीजों को बुखार संग सांस लेने में दिक्कत हुई उनमें एंटीबॉडी बनने की संभावना बढ़ जाती है। वह बताते हैं कि अब तक 50 से ज्यादा लोग प्लाज्मा डोनेशन कर चुके हैं। आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में एंटीबॉडी बनती है। लोहिया संस्थान के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.वीके शर्मा के अनुसार रिपोर्ट नेगेटिव आने के 14 दिन बाद कोई भी कोरोना विजेता प्लाज्मा दान कर सकता है। इसमें महिलाएं शामिल नहीं हैं। उन्होंने बताया कि 25 प्रतिशत में संक्रमण के सात दिन में एंटीबॉडी बन रही है। 50 प्रतिशत में सात से 14 दिन में एंटीबॉड बनती हैं।90 प्रतिशत मरीजों में 14 से 21 दिन में एंटीबॉडी बनती हैं।

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