Advertisement
Home Lifestyle श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर पर नियंत्रण किसका?, फैसला सोमवार को

श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर पर नियंत्रण किसका?, फैसला सोमवार को

0
624

नयी दिल्ली। केरल उच्च न्यायालय ने 2011 में अपना फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, इसकी परिसम्पत्तियों और प्रबंधन पर नियंत्रण लेने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने सभी मेहराबों को खोलकर सभी वस्तुओं की एक सूची तैयार करने और उन वस्तुओं को एक संग्रहालय बनाकर जनता की प्रदर्शनी के लिए रखने का आदेश दिया था जिसे बाद में पूर्ववर्ती त्रावणकोर रॉयल परिवार ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय केरल के ऐतिहासिक पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और परिसम्पत्तियों पर नियंत्रण को लेकर सोमवार को बहुप्रतीक्षित निर्णय सुनाएगा।

जानिये रत्न धारण करने के मंत्र

Advertisment

न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की खंडपीठ को इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपना निर्णय सुनाना है कि इस ऐतिहासिक मंदिर के प्रबंधन का कार्य राज्य सरकार देखेगी या त्रावणकोर का पूर्ववर्ती रॉयल परिवार। इस मंदिर की अकूत सम्पत्तियों पर नियंत्रण को लेकर भी न्यायालय को अपना महत्वपूर्ण निर्णय सुनाना है।

न्यायालय को इस बात का भी निर्धारण करना है कि क्या यह मंदिर सार्वजनिक सम्पत्त्ति है और इसके लिए तिरुपति तिरुमला, गुरुवयूर और सबरीमला मंदिरों की तरह ही देवस्थानम बोर्ड की स्थापना की आवश्यकता है या नहीं? खंडपीठ इस बिंदु पर भी निर्णय सुना सकता है कि त्रावणकोर के पूर्ववर्ती रॉयल परिवार का मंदिर पर किस हद तक अधिकार होगा और क्या मंदिर के मेहराब ‘बी’ को खोला जाये या नहीं।

यह भी पढ़ें – काशी विश्वनाथ की महिमा, यहां जीव के अंतकाल में भगवान शंकर तारक मंत्र का उपदेश करते हैं

विभिन्न न्यायाधीशों की अलग-अलग खंडपीठों ने इस मामले की आठ साल से अधिक समय तक सुनवाई की थी और मंदिर के मेहराब में रखी गयी बहुमूल्य चीजों की एक सूची बनवाने में प्रमुख भूमिका निभायी थी। अंतत: न्यायमूर्ति ललित और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की खंडपीठ ने गत वर्ष अप्रैल में इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था।

यह भी पढ़ें – इस मंत्र के जप से प्रसन्न होते हैं शनि देव, जानिए शनि देव की महिमा

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम को न्याय मित्र बनाया गया था, जिन्होंने बाद में खुद को इससे अलग कर लिया था। श्री सुब्रह्मण्यम ने एक स्वतंत्र रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की थी। दूसरी रिपोर्ट पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) विनोद राय ने सौंपी थी। ऐसा कहा जाता है कि इन रिपोर्टों में तमाम वित्तीय गड़बड़ियों और मंदिर के खातों में अनियमितताओं का उल्लेख भी किया गया है। बहुमूल्य धातुओं के इस्तेमाल में भी गड़बड़ी की आशंका रिपोर्ट में जतायी गयी थी।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here