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वृंदावन का श्री राधारमणलाल मंदिर, जो है आस्था का केंद्र

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श्री राधारमणलाल मंदिर में करीब पौने पांच सौ वर्ष से माचिस का प्रयोग नहीं किया गया। आज भी ठाकुर की आरती पौने पांच सौ वर्ष पूर्व प्रकट अग्नि से की जाती है। वृन्दावन एक अति पावन भूमि है। यहां पर भगवान श्री कृष्ण ने लीलाएं की थीं। यहां वृंदावन में श्रीराधारमणलाल मंदिर है। इस मंदिर की बहुत मान्यता है। यहां श्रीराधारमणलाल पहले शालिग्राम के रूप में विराजते थे। एक समय की बात है कि किसी भक्त ने श्रीधाम आकर सभी श्रीविग्रहों के लिए वस्त्र और अलंकार आदि भेट किये। तब भक्त श्रीपाद गोपाल भट्ट गोस्वामी ने विचार किया कि यदि मेरे आराध्य भी अन्य श्रीविग्रह की तरह से होते तो उन्हें भी वस्त्र व आभूषण से अलंकृत करता। श्रीनृसिंह चतुर्दशी के दिन प्रह्लाद के प्रेम के वशीभूत होकर प्रभु खम्भे से प्रकट हो सकते हैं तो क्या मेरा भी ऐसा सौभाग्य होगा कि प्रभु शालिग्राम से प्रकट हो जाएं। ऐसा विचार कर वे प्रभु की भक्ति में लीन हो गए।

भक्तिवश उन्हें नमन करने लगे। उनकी प्रार्थना में डूब गए। वह दिन तो बीत गया, लेकिन रात्रि व्यतीत होने के बाद वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को उनके आनंद की सीमा न रही कि शालिग्राम त्रिभंगललित, द्बिभुज, मुरलीधर और मधुर मूर्ति श्याम रूप में विराजमान है। सम्वत् 1599 की वह वैशाख शुक्ल पूर्णिमा व्रजमंडल में उल्लास से परिपूर्ण रही। यहां प्रकटे श्री राधारमणलाल का मुख श्रीगोविंद देव के समान, वक्ष: स्थल गोपीनाथ के समान और चरणयुगल श्रीमदन मोहन के समान है, श्रीराधारमणलाल के दर्शन कर श्रद्धालु एक ही श्री विग्रह में चारों श्री विग्रहों के दर्शन प्राप्त कर लेते हैं। भक्तिरत्नाकर ग्रंथ से पता चलता है कि श्रीपाद गोपाल भट्ट गोस्वामी ने श्रीचैतन्य महाप्रभु की सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया था। तब प्रभु ने यह आदेश दिया था कि गोपाल तुम वृंदावन चले जाओं, वहां श्रीरूप सनातन के निकट रह कर भजन-साधन कर तुम्हें श्री कृष्ण की प्राप्ति होगी।

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माता-पिता के देहावसान के बाद श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी सबकुछ त्याग कर श्रीधाम वृंदावन आ गए वे कुछ दिन श्रीराधा श्यामकुंड के बीच केलिकदम्ब के नीचे रहे, फिर जावट ग्राम के पास किशोरकुण्ड भजन साधना करने लगे। महाप्रभु को इस बात का भान हुआ तो प्रभु ने अपनी डोर, कौपीन, वहिर्वास और एक आसन इनके लिए इनक लिए भेजा, जो श्रीराधारमण मंदिर में आज भी संरक्षित है। उल्लेखनीय है कि श्रीराधारमणलाल जी का मंदिर गौड़ीय सप्तदेवालयों में से एक है। यह मंदिर श्री राधावल्लभ जी, श्री गोविंद देव जी और चार अन्य सहित वृंदावन के ठाकुर के 7 मंदिरों में से एक है। मंदिर विशेष रूप से तैयार किया गया है तथा वृंदावन में सबसे अधिक पूजित मंदिरों में से एक है, विशेषकर गौड़ीय वैष्णववाद के अनुयायियों द्वारा पूजित है। इसमें राधारानी के साथ कृष्ण के मूल शालिग्राम देवता हैं।

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