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“सूर्य स्नान: तन-मन को रोगमुक्त और ऊर्जावान बनाने का रहस्य”

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बदलती जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के बीच लोग स्वास्थ्य के लिए योग, ध्यान और व्यायाम को अपनाते हैं, लेकिन सूर्य स्नान जैसे सहज और प्राकृतिक उपाय पर कम ही ध्यान जाता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही सूर्य स्नान को स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसकी विधि सही ढंग से अपनाई जाए तो यह तन-मन दोनों को सशक्त बनाता है।

सुबह का समय सूर्य स्नान के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। इस दौरान सूर्य की किरणें हल्की, शांत और स्वास्थ्यदायक होती हैं। तीखी धूप से बचते हुए हल्की धूप में बैठना लाभकारी है। शुरुआत में आधे घंटे का सूर्य स्नान पर्याप्त माना गया है, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर एक से डेढ़ घंटे तक किया जा सकता है।

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सूर्य स्नान के दौरान हल्के और ढीले वस्त्र पहनना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक शरीर की सतह पर धूप पड़े। एकांत स्थान होने पर बिना वस्त्र धूप लेना और भी लाभकारी बताया गया है। सिर को ठंडा रखने के लिए केले, कमल, नीम या पीपल के पत्तों का प्रयोग करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य स्नान करते समय शरीर को चार भागों में बाँटकर धूप लेना चाहिए—पेट, पीठ, दायाँ करवट और बायाँ करवट। इससे शरीर का हर हिस्सा समान रूप से सूर्य की किरणों का लाभ प्राप्त कर पाता है। स्नान के बाद गीले तौलिए से शरीर को रगड़ना जरूरी है, ताकि पसीने के साथ निकली अशुद्धियाँ त्वचा पर न जमें।

महत्वपूर्ण बात यह है कि सूर्य स्नान हमेशा खाली पेट करना चाहिए। स्नान से कम से कम दो घंटे पहले और स्नान के आधे घंटे बाद तक भोजन नहीं करना चाहिए। साथ ही, स्थान ऐसा होना चाहिए जहाँ ताजी हवा और हल्की बयार मिल सके।

सूर्य स्नान से स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। यह हड्डियों को मज़बूत करता है, चोट और घावों को भरने में मदद करता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। पसीने के माध्यम से शरीर की अशुद्धियाँ बाहर निकल जाती हैं और रोगाणु तथा कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित सूर्य स्नान हर आयु वर्ग—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—के लिए लाभकारी है।

हालांकि, बादलों और तेज़ हवा वाले दिनों में सूर्य स्नान से बचना चाहिए। ऋतु और परिस्थिति के अनुसार सूर्य स्नान के बाद ठंडे पानी से नहाना सर्वोत्तम माना गया है।

सूर्य स्नान न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक संतुलन और प्रसन्नता भी प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे स्वास्थ्य और ऊर्जा का एक प्राकृतिक रहस्य कहा जाता है।

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