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एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता पर मंथन

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विचार गोष्ठी आयोजित
लखनऊ, सनातन जन संवाददाता। उत्तर मंडल-5 के कार्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहकर उनके “एकात्म मानववाद” दर्शन की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर गंभीर मंथन के रूप में मनायी गयी।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चिंतन आज के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान में जन्मे उपाध्याय जी ने अपने जीवन को राष्ट्रसेवा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित किया।
वक्ताओं ने कहा कि “एकात्म मानववाद” केवल राजनीतिक दर्शन नहीं, बल्कि भारतीय जीवन दृष्टि का समग्र मॉडल है, जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के संतुलित विकास की बात करता है। आज जब विकास की परिभाषा प्रायः आर्थिक आंकड़ों तक सीमित कर दी जाती है, तब उपाध्याय जी का विचार मानव गरिमा, सांस्कृतिक मूल्यों और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखता है।
मंडल अध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन संगठनात्मक प्रतिबद्धता और सादगी का प्रतीक था। सीमित संसाधनों में भी उन्होंने वैचारिक आधार पर मजबूत संगठन खड़ा किया और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा दी।
पुण्यतिथि पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष संजय तिवारी (उ.मं.-5), मंडल महामंत्री अक्षय मिश्रा, कौशल किशोर पाठक, दाताराम शुक्ला, सर्वेश सिंह, कमलेश्वर सोनी, विनय गुप्ता, धनराज मिश्रा, राजीव मिश्रा, प्रशस्त तिवारी, मीरा पाण्डेय, दिव्यांशी शुक्ला, पूनम राय, रंजना द्विवेदी, लक्ष्मी कश्यप, बिन्दू श्रीवास्तव, जया पाण्डेय एवं ओम प्रकाश तिवारी (मीडिया प्रभारी) सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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