Advertisement
Home Religious Jyotish पितृ विसर्जन अमावस्या पर जलाएं आटे का चौमुखी दीपक

पितृ विसर्जन अमावस्या पर जलाएं आटे का चौमुखी दीपक

0
90

पितरों का मिलेगा आशीर्वाद!

10 अक्टूबर को पितृपक्ष की अमावस्या पर करें आसान उपाय, आटे में काला तिल, चीनी और हल्दी मिलाकर बनाएं दीपक; सरसों के तेल से दीपदान कर करें पितरों का स्मरण

पितृपक्ष में यदि आप किसी कारणवश अपने पितरों के लिए तर्पण, दान या कोई विशेष अनुष्ठान नहीं कर पाए हैं, तो 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन घर पर एक सरल उपाय कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या पर पितरों का स्मरण, तर्पण और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है। इस उपाय में आटे से चौमुखी दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डालकर दक्षिण दिशा में जलाया जाता है।

आटे का चौमुखी दीपक बनाने की विधि

इस उपाय के लिए थोड़ा सा गेहूं का आटा, काला तिल, चीनी, हल्दी और पानी लें। सबसे पहले आटे में काला तिल, चीनी और हल्दी मिलाएं। अब थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर मिश्रण को अच्छी तरह गूथ लें। आटा इतना सख्त रखें कि उससे दीपक का आकार आसानी से बनाया जा सके। इसके बाद आटे से चार मुख वाला दीपक तैयार करें और चारों मुखों पर बातियां रखने की जगह बनाएं।

Advertisment

सरसों के तेल का दीपक जलाने का धार्मिक महत्व

पितृपक्ष में दीपदान को पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का एक माध्यम माना जाता है। इस उपाय में सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा का पालन किया जा सकता है। लोक-मान्यताओं में सरसों के तेल से दीपक जलाना नकारात्मकता दूर करने और बाधाओं से मुक्ति की कामना से भी जुड़ा है। पितरों के निमित्त दक्षिण दिशा में दीपदान करने की परंपरा भी प्रचलित है।

ध्यान रहे कि आटे के चौमुखी दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाना इस विशेष उपाय का हिस्सा है। इसे सभी परंपराओं के लिए अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं माना जाना चाहिए। धार्मिक कर्मकांड में परिवार की परंपरा और स्थानीय मान्यताओं का भी महत्व होता है।

दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक

पितरों की दिशा दक्षिण मानी जाती है। इसलिए धार्मिक परंपरा के अनुसार दीपक को घर की दक्षिण दिशा में किसी साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें। आटे से बने चौमुखी दीपक में सरसों का तेल डालें और चारों मुखों पर रूई की बातियां रखकर जलाएं।

दीपक के पास पानी से भरा एक लोटा रखें। इसके बाद दूसरे लोटे से थोड़ा जल अर्पित करते हुए ‘ॐ पितृ देवाय नमः’ मंत्र का जाप करें और अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। परिवार की सुख-समृद्धि, पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करें।

दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें। उसे पर्दे, कपड़े, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर किसी स्थिर स्थान पर रखें। दीपक को जलता हुआ छोड़कर न जाएं। इसके अलावा इसी तरह का एक अन्य दीपक पीपल के पेड़ के नीचे भी आज के दिन जलाया जा सकता है।

श्रद्धा से करें पितरों का स्मरण

पितृ विसर्जन अमावस्या पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर मानी जाती है। इस दिन तर्पण, दान, प्रार्थना और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा है। यदि आप पितृपक्ष में कोई विशेष कर्म नहीं कर पाए हैं, तो अमावस्या पर अपने पितरों का स्मरण कर उनकी शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना कर सकते हैं।

धार्मिक आस्था में कर्मकांड के साथ श्रद्धा, सद्भाव और पूर्वजों के प्रति सम्मान को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए पितृ विसर्जन अमावस्या पर सरसों के तेल का दीपक जलाते समय अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनकी स्मृति में सत्कर्म करने का संकल्प लें।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here