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तंत्रशास्त्र में इसे कहते हैं श्रीफल, जो देता है धन-वैभव

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वैसे तो श्रीफल के आप जानते होंगे, आम तौर पर हम बेल, नारियल अनार आदि को भी श्रीफल के नाम से जानते हैं, लेकिन तंत्र शास्त्र में अगल तरह के फल को श्रीफल माना जाता है।

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तंत्रशास्त्र यह विशिष्ट फल ही श्रीफल माना जाता है। इसी श्रीफल के बारे में हम आज आपको बताने जा रहे हैं, जिसका विशेष तौर पर तांत्रिक अनुष्ठान में विशेष महत्व माना जाता है। जिस श्रीफल की हम बात कर रहे हैं, वह देखने में बहुत ही छोटा होता है। यह आकार में इलायची के जैसा होता है। इसके रंग में हल्का पीलापन लिये सफेद और रूपाकार में नारियल के फल जैसा होता है। इस फल पर जटायें होती हैं। टहनी की ओर इस पर भी तीन बिन्दु पाये जाते हैं। जैसे नारियल में होती हैं। इस तरह यह नारियल का लघु संस्करण कहा जा सकता है, लेकिन अंतर आकार-प्रकार व रंगरूप को लेकर लेकर होता है।

इस फल का प्रभाव अद्भुत होता है और और इसका विधिवत प्रयोग किया जाये तो यह चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। इसके प्रभाव से घर में धन-वैभव का अभाव नहीं रहता है। धन-धान्य से घर भरा रहता है। वहां खुशहाली का वास रहता है। माता लक्ष्मी की कृपा उस पर रहती है, बशर्तें घर में धर्मानुकूल आचरण व पूजन-अर्चन होना चाहिए। आइये अब जानते हैं, इस श्रीफल के तांत्रिक पूजन के बारे में, जिसके प्रभाव से आपको धन व वैभव की प्राप्ति होती है।

जानिए,धन – वृद्धि के लिए श्रीफल का तांत्रिक प्रयोग

किसी शुभ दिन श्रद्धा व विश्वास के साथ श्रीफल ले आयें और फिर इसे धो लें, फिर इसे पोंछकर, लाल रंग के कपड़े में लपेटकर पूजाघर में रख दें। फिर इस पर श्रद्धा व आस्था के साथ सिदूर, कपूर, लौंग, छोटी इलायची आदि चढ़ायें। इस पर कोई सिक्का आदि भी चढ़ा दें। फिर धूप- दीप से पूजा करें। उसके बाद में 11 माला इस निम्न उल्लेखित मन्त्र का जप करें।

मन्त्र है-   ॐ श्रीं श्रियै नमः ।

फिर उसे किसी कटोरी में ( कपड़े सहित ) रख दें। उसकी प्रतिदिन पूजा करते रहें। कभी – कभी सिक्के भी चढ़ाते रहें। इस प्रकार से पूजा करते रहने से धन – वृद्धि होती है और माता लक्ष्मी जी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। धन – सम्पदा की वृद्धि के लिये योग बहुत ही सरल और प्रभावशाली है। यह चमत्कारिक उपाय श्रद्धा से आजमाने से साधक को धन-वैभव की प्राप्ति होती है। उसके घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है।

वैसे आप इस श्री फल को बक्से में भी रख सकते हैं। इससे इसमें मुद्राएं बढ़ने लगती है, लेकिन यह ध्यान में रखना चाहिये कि उस बढ़ती हुई मुद्राओं से कभी कोई राशि निकालें नहीं, अन्यथा मुद्राएं निकालने से वृद्धि रुक जाती है। बक्से में रखे श्रीफल के पैसे कभी न लें, बल्कि उस पर कुछ न कुछ चढ़ाते रहें। जब धीरे – धीरे काफी रुपए इकट्ठे हो जाये तो फिर उस राशि को किसी शुभ और जनहितकारी कार्य में खर्च कर दें। यह प्रयोग अनुभूत है और चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। इसी तरह से आप इसे अन्न भंडार में भी रख सकते हैं। अन्न भण्डार में श्रीफल रखने से वह सदैव भरा ही रहता है। इसी तरह से आप इस श्रीफल को गोलक भी रख सकते हैं। श्रीफल को गोलक में रखकर गोलक की प्रतिदिन धूप – दीप से पूजा करें और उसमें पैसे भी डालते रहें।

नवरात्रि में दुकान में रखने से होती है धन-वैभव में वृद्धि

चूंकि नवरात्रि का समय बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए नवरात्रि के नौ दिनों में से किसी भी दिन अपनी दुकान, प्रतिष्ठान में रखना चाहिए। यह मन्त्र सिद्ध श्रीफल दुकान या प्रतिष्ठान में किसी शुद्ध व सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए। इसके उपरान्त उसे नित्य धूपदीप करके पूजन-अर्चन करें। समय-समय पर यहां कोई सिक्का चढ़ाते रहें। यह प्रयोग करने से उस प्रतिष्ठान – दुकान की आर्थिक स्थिति में धीरे – धीरे बहुत अधिक सुधार होने लग जायेगा। धन व वैभव में वृद्धि होती जाती है। उस स्थान की पवित्रता को बनाए रखने का सदैव साधक ध्यान रखना चाहिए। अशुद्ध कार्य व आचरण से साधक को बचना चाहिए। जो साधक नित्य पूजन-अर्चन करता है, उस पर माता लक्ष्मी की कृपा आवश्य होती है। उसके धन-वैभव में भी वृद्धि होती है।

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