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कट्टरता पर करारा वार: साहिबजादों ने हिला दी सल्तनत

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नई दिल्ली(एजेंसियां)। वीर बाल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इतिहास के उन स्वर्णिम पन्नों को देश के सामने रखा, जिनसे आज भी धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद की जड़ें कांप उठती हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वीर साहिबजादों का बलिदान केवल शहादत नहीं था, बल्कि धार्मिक कट्टरता और आतंक के अस्तित्व पर सीधा प्रहार था, जिसने क्रूर मुगल सल्तनत की नींव हिला दी।

राष्ट्रीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत उन वीर साहिबजादों को नमन कर रहा है, जिन्होंने बहुत कम उम्र में अत्याचार के सामने झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि साहिबजादे भारत के अदम्य साहस, धर्मनिष्ठा और राष्ट्र चेतना की सर्वोच्च अभिव्यक्ति हैं। उनकी वीरता ने यह साबित कर दिया कि उम्र नहीं, विचार और संस्कार इतिहास रचते हैं

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प्रधानमंत्री ने कहा कि 26 दिसंबर 1704 भारत के इतिहास का वह दिन है, जिसने बलिदान की परिभाषा बदल दी। गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के छोटे पुत्र साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह को इस्लाम स्वीकार करने से इनकार करने पर जिंदा ईंटों में चुनवा दिया गया, जबकि बड़े पुत्र साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह ने चमकौर के युद्ध में दुश्मन की सेना से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल चार बालकों की शहादत नहीं थी, बल्कि भारत की आत्मा की रक्षा का युद्ध था

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह संघर्ष सत्ता और साधारण बालकों के बीच नहीं था, बल्कि भारत के मूलभूत आदर्शों और धार्मिक कट्टरता के बीच निर्णायक टकराव था। एक ओर दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज थे, जो त्याग और तपस्या की साक्षात प्रतिमूर्ति थे, और दूसरी ओर औरंगजेब का क्रूर शासन, जो भय के बल पर धर्म थोपना चाहता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि औरंगजेब की क्रूरता इतनी भीषण थी कि वह उम्र तक नहीं देखता था, लेकिन इसके बावजूद मुगल सल्तनत साहिबजादों के संकल्प को नहीं तोड़ सकी

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुगल शासक और उसके सेनापति यह भूल गए थे कि गुरु गोविंद सिंह जी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वीर साहिबजादों को अपने पिता से तप, त्याग और बलिदान की विरासत मिली थी, इसलिए जब पूरा साम्राज्य उनके खिलाफ खड़ा था, तब भी वे अडिग रहे। यही कारण है कि आज औरंगजेब इतिहास के अंधेरे पन्नों में सिमट चुका है, जबकि साहिबजादे भारत की चेतना में अमर हैं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिवस है। यह दिन नई पीढ़ी को बताता है कि भारत की सभ्यता को डर, आतंक और कट्टरता कभी झुका नहीं पाई। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में वीर बाल दिवस की परंपरा ने साहिबजादों की गाथा को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया है और युवाओं को राष्ट्रधर्म के प्रति जागरूक किया है

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर वर्ष 26 दिसंबर को उन्हें संतोष होता है कि देश साहिबजादों की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। वीर बाल दिवस ने साहसी, प्रतिभाशाली और राष्ट्रनिष्ठ बच्चों को पहचान देने का मंच तैयार किया है। इसी भावना के तहत हर साल देश के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट संदेश दिया कि भारत का भविष्य उन मूल्यों पर खड़ा होगा, जिनके लिए साहिबजादों ने बलिदान दिया। यह बलिदान आज भी धार्मिक कट्टरता, आतंकवाद और अत्याचार के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

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