यह भी पढ़ें –अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाता है महामृत्युंजय मंत्र
त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु व महेश यानी शिव। त्रिदेवों में भगवान शिव यानी शंकर को भोलेनाथ कहा जाता है, यदि श्रद्धा भाव से युक्त होकर इनकी अराधना की जाए तो यह शीघ्र प्रसन्न होते हैं। आदि पुरुष भूतभावन भगवान शंकर का पूजन-अर्चन यदि सावन में किया जाए तो वे भक्त पर अतिशीघ्र कृपा करते हैं।
ऐसे भगवान भोलनाथ का पूजन अर्चन यदि सावन के सोमवार के अवसर पर किया जाता है तो भूतभावन भगवान शंकर की कृपा अतिशीघ्र प्राप्त होती है। इसमें संशय नहीं है। यदि सावन के पावन महीने में महामृत्युंजय मंत्र से भोलेनाथ का सुमिरन किया जाता है तो नि: संदेह भक्त को कल्याण की प्राप्ति होती है। भगवान शंकर की कृपा से मृत्यु को भी टाला जा सकता है। भगवान शंकर के पावन महामंत्र महामृत्युंजय को संजीवनी मंत्र भी इसलिए कहा जाता है।
महामृत्युंजय से होता है इन दोषों का नाश
पाँच एक-लाइन प्वाइंट्स:
-
शिव को समर्पित महामृत्युंजय मंत्र के जप से अकाल मृत्यु और भय का निवारण होता है।
-
नियमित पाठ से ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा का क्षय होता है।
-
यह मंत्र शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल को बढ़ाता है।
-
संकट, रोग और शत्रु बाधा से रक्षा के लिए इसे अत्यंत प्रभावी माना गया है।
-
श्रद्धा और विधि से जप करने पर जीवन में सुख, शांति और आयु की वृद्धि होती है।
#महामृत्युंजय_मंत्र, #शिव_उपासना, #ग्रह_दोष_निवारण, #आध्यात्मिक_शक्ति, #संकट_मोचन
यह भी पढ़ें – काशी विश्वनाथ की महिमा, यहां जीव के अंतकाल में भगवान शंकर तारक मंत्र का उपदेश करते हैं
यह भी पढ़ें –संताप मिटते है रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन से
यह भी पढ़ें – शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही क्यों करनी चाहिए ? जाने, शास्त्र मत
यह भी पढ़ें – साधना में होने वाली अनुभूतियां, ईश्वरीय बीज को जगाने में न घबराये साधक
यह भी पढ़ें – यहां हुंकार करते प्रकट हुए थे भोले शंकर, जानिए महाकाल की महिमा










