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उत्तर मंडल पांच ने उत्साह से मनाया भाजपा का स्थापना दिवस

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सनातनजन संवाददाता, लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के मंडल कार्यालय उत्तर मंडल पांच पर पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी हुई। अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष संजय तिवारी ने किया। पण्डित दीनदयाल उपाध्याय और डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

मंडल महामंत्री अक्षय मिश्रा ने संगोष्ठी का संचालन किया। संजय तिवारी ने कहा कि हम भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस का गौरवपूर्ण उत्सव मना रहे हैं। यह केवल एक राजनीतिक दल का स्थापना दिवस नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा, विचारधारा और समर्पण की उस यात्रा का उल्लेख है, जिसने भारत की राजनीति को एक नई दिशा दी है। भाजपा की स्थापना 1980 में हुई थी, लेकिन इसकी जड़ें भारतीय जनसंप की राष्ट्रवादी विचारधारा में गहराई तक समाई हुई हैं। यह पार्टी केवल सत्ता प्राति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित एक जनआंदोलन है।

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भाजपा में हमेशा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मूल मंत्र को अपनाया है। देश के अतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प इस पार्टी की पहचान बन चुका है। चाहे गरीब कल्याण की योजनाएँ हों, बुनियादी ढांचे का विकास हो। मीडिया प्रभारी ओम प्रकाश तिवारी ने बताया कि मंडल महामंत्री सी के वर्मा ने कहा कि हमें उन महान विभूतियों का भी स्मरण करना चाहिए, जिनके त्याग और तपस्या से संगठन आज इस मुकाम पर पहुंचा है। उनके आदर्श हमें प्रेरणा देते हैं कि हम भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी से करें। हमारा लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं है।

गरीब, किसान, युवा, महिला हर वर्ग के उत्थान के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है। कार्यकर्ताओं से आह्वान करता हूँ कि हम सभी मिलकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाएं। कौशल किशोर पाठक, विशाल रावत, सर्वेश सिंह, नमोनारायण दूबे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। अक्षय मिश्रा ने कहा कि इस पार्टी की नींव जिन्होने रखी और इसे मजबूत बनाया उनका त्याग, तपस्या और समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है भाजपा की सबसे बड़ी ताकत आप जैसे समर्पित कार्यकर्ता हैं।

संजय तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज हम सभी गर्व और उत्साह के साथ भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर एकत्रित हुए हैं। यह दिन राष्ट्रभक्ति, त्याग, समर्पण और सेवा की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसने भारत की राजनीति को नई दिशा दी है। अंत में बंदेमातरम गीत गाया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

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