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महावीर मंदिर में पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी

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पटना। देश में अग्रणी हनुमान मन्दिरों में से एक पटना के महावीर मंदिर में पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।राजधानी पटना में रेलवे स्टेशन के निकट स्थित हनुमान मन्दिर देश में अग्रणी हनुमान मन्दिरों में से एक है। यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है।इस मंदिर की ख्याति देश-विदेश में मनोकामना मन्दिर के रूप में है, जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।

 

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हनुमान मंदिर हिन्दुओं की आस्था का सबसे बडा केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु हुमानजी की पूजा-अर्चना करने आते है। यह उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर भी माना जाता है।

माना जाता है कि हनुमानगढ़ी के बाद ये एकलौता हनुमान जी का मंदिर है जहां भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ नजर आती है।यहां हर दिन बड़ी संख्या में भक्तों का आना जाना लगा रहता है, हालांकि मंगलवार और शनिवार के दिन यहां भक्तों की खासी भीड़ देखी जाती है। इस मंदिर की खास बात है कि यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां यानि दो मूर्तियां एक साथ हैं।

एक मूर्ति परित्राणाय साधुनाम् (अर्थात अच्छे लोगों के कारज पूर्ण करने वाली) तो दूसरी विनाशाय च दुष्कृताम्बु (अर्थात बुरे लोगों की बुराई दूर करने वाली) है।

वर्ष 1730 में स्वामी बालानंद ने पटना जंक्शन के पास महावीर मंदिर की स्थापना की थी। नए भव्य मन्दिर का जीर्णोद्धार साल 1983 से 1985 के बीच किया गया।माना जाता है कि इस मंदिर से मिलने वाले प्रसाद को खाने से हर तरह की बीमारी ठीक हो जाती है। इस मंदिर में नैवेद्यम का लड्डू बजरंगबली को भोग के रूप में लगाया जाता है। यह लड्डू काफी स्वादिष्ट होता है। इस प्रसाद को लेकर मान्यता है कि इस लड्डू को खाने से लोग कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। रामनवमी के मौके पर हनुमान मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। यहां पर बड़ी संख्या में लोग दूर-दूर से आते हैं। इस खास मौके पर महावीर मंदिर में भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की शोभा यात्रा निकाली जाती है।

महावीर मंदिर का क्षेत्रफल करीब 10 हजार वर्ग फुट है।मंदिर की पहली मंजिल पर देवताओं के चार गर्भगृह हैं। इनमें से एक भगवन राम का मंदिर है, जहां से इसका प्रारंभ होता है। मंदिर में एक अस्थायी राम सेतु भी मौजूद है। इस सेतु को कांच के एक पात्र में रख गया है जिसका वजन करीब 15 किलोग्राम है। जिस तरह रामसेतु के पत्थर समुद्र की लहरों पर तैर रहे थे उसी तरह रामसेतु का टुकड़ा भी यहां पानी में तैर रहा है।

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