लखनऊ। राजधानी लखनऊ में गुरुवार को आस्था और उत्साह का अनुपम संगम देखने को मिला, जब श्री श्याम ज्योत मंडल के तत्वावधान में आयोजित होने वाले 44वें श्री श्याम निशानोत्सव के अंतर्गत बाबा श्याम की पावन छवि दिल्ली से लखनऊ पहुंची। ऐशबाग के तिलकनगर स्थित महाराजा अग्रसेन पार्क में 20 फरवरी, शुक्रवार से प्रारंभ हो रहे तीन दिवसीय भव्य आयोजन की तैयारियां पूर्ण श्रद्धा और उल्लास के साथ की जा रही हैं।
बाबा श्याम की छवि जैसे ही चारबाग रेलवे स्टेशन पहुंची, वहां सैकड़ों श्रद्धालु पहले से ही दर्शन और स्वागत के लिए उपस्थित थे। “हारे के सहारे की जय हो” और “कलयुग के अवतारी की जय हो” जैसे गगनभेदी जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। भक्तों ने पुष्प वर्षा कर, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते हुए और गुलाल उड़ाकर शीश के दानी का भव्य स्वागत किया।
मंडल के मीडिया प्रभारी अनुपम मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि चारबाग स्टेशन से बाबा श्याम की छवि को शोभायात्रा के रूप में ऐशबाग स्थित श्री श्याम ज्योत मंडल के कार्यालय लाया गया। इस दौरान श्याम प्रेमी श्रवण अग्रवाल ने बाबा श्याम का शीश अपने सिर पर धारण किया। यह दृश्य अत्यंत भावुक और श्रद्धा से परिपूर्ण था। महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति गीत गाते हुए, रंगों और पुष्पों की वर्षा करते हुए मंडल कार्यालय तक पहुंचे।
तिलकनगर स्थित मंडल कार्यालय में बाबा श्याम की छवि को एक दिन के विश्राम हेतु विराजमान किया गया है। 20 फरवरी को मल्ल राजवंश के राजदरबार में बाबा की छवि को भक्तों के दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां हजारों श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।
प्रतिवर्ष सचिन गोयल इस पावन छवि को दिल्ली से लखनऊ लेकर आते हैं। श्रद्धालुओं के बीच यह छवि अत्यंत सिद्ध और चमत्कारी मानी जाती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस छवि के समक्ष शीश झुकाता है, उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि इस आयोजन में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।
इस छवि की धार्मिक विशेषता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसे प्रत्येक एकादशी को राजस्थान के सीकर जिले में स्थित पवित्र श्याम कुण्ड में स्नान कराया जाता है। इसके पश्चात एक रात्रि के लिए छवि को खाटू श्याम मंदिर में विराजमान बाबा श्याम के साथ रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे छवि में बाबा की दिव्य शक्ति का संचार होता है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस सिद्ध छवि के दर्शन करने से वही आध्यात्मिक सुख और शांति प्राप्त होती है, जो उन्हें खाटू धाम की यात्रा करने पर अनुभव होती है। अनेक भक्तों ने अपने जीवन में बाबा श्याम की कृपा से हुए सकारात्मक परिवर्तनों के अनुभव साझा किए हैं।
44वें श्री श्याम निशानोत्सव के अंतर्गत तीन दिनों तक भजन संध्या, कीर्तन, हवन, प्रसाद वितरण तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। महाराजा अग्रसेन पार्क में भव्य सजावट की गई है। पूरे क्षेत्र को रोशनी और फूलों से सुसज्जित किया गया है, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक बन गया है।
आयोजकों के अनुसार, निशानोत्सव में दूर-दराज से भी श्याम भक्त शामिल होने आ रहे हैं। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। स्वयंसेवकों की टीम भक्तों की सेवा में तत्पर रहेगी।
लखनऊ की धरती पर इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का भी संदेश जाता है। बाबा श्याम की कृपा और आशीर्वाद से यह आयोजन सफल और मंगलमय होने की कामना की जा रही है।
भक्तों की श्रद्धा और विश्वास ही इस आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति है। जैसे-जैसे निशानोत्सव के दिन निकट आ रहे हैं, वैसे-वैसे श्याम भक्तों का उत्साह और उमंग भी चरम पर है। तिलकनगर में बाबा श्याम की छवि का यह दिव्य स्वागत लंबे समय तक भक्तों की स्मृतियों में अंकित रहेगा।
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