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हनुमान चालीसा की चौपाइयों को सिद्ध करने की संपूर्ण विधि

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हनुमान चालीसा का महत्व केवल कुछ चौपाइयों तक सीमित नहीं है। यह सम्पूर्ण स्तुति व्यक्ति को धैर्य, साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है। भक्तों का अनुभव है कि श्रद्धा और नियमितता से किया गया पाठ मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ाता है।

यदि आप भी पवनपुत्र हनुमान जी की सच्चे मन से वंदना करते हैं, तो जीवन में आशा, साहस और विश्वास का संचार अवश्य होगा।

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हनुमान चालीसा की चौपाइयों को “सिद्ध” करने का अर्थ तांत्रिक चमत्कार नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और निरंतर साधना के माध्यम से मन, वाणी और कर्म की शुद्धि करना है। सनातन परंपरा में मंत्र-साधना का मूल आधार नियम और निष्ठा है। हनुमान चालीसा तथा हनुमान की उपासना इसी भाव पर आधारित है।

1️⃣ भूत-पिशाच निकट नहीं आवे।

महावीर जब नाम सुनावे।।

भावार्थ: भय, नकारात्मकता और मानसिक अशांति से मुक्ति की प्रार्थना।
नियमित जप से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।

2️⃣ नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

भावार्थ: शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत की कामना।
श्रद्धा के साथ पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है। (स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सकीय सलाह भी आवश्यक है।)

3️⃣ अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।।

भावार्थ: आत्मबल, क्षमता और समृद्धि की कामना।
यह चौपाई आंतरिक शक्ति और दृढ़ निश्चय को जागृत करने का प्रतीक है।

4️⃣ विद्यावान गुनी अति चातुर।

रामकाज करिबे को आतुर।।

भावार्थ: ज्ञान, बुद्धि और कर्मनिष्ठा का आशीर्वाद।
विद्या और कार्य में सफलता के लिए यह चौपाई प्रेरणास्रोत मानी जाती है।

5️⃣ भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्रजी के काज संवारे।।

भावार्थ: बाधाओं को दूर कर कार्य सिद्धि की प्रार्थना।
जीवन में आ रही रुकावटों को दूर करने की मानसिक शक्ति प्रदान करती है।

नीचे एक सामान्य, सात्विक प्रक्रिया दी जा रही है:

1. संकल्प (Sankalp)

  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  • दीपक (तिल या सरसों के तेल का) और अगरबत्ती जलाएँ।

  • हनुमान जी की प्रतिमा/चित्र के सामने बैठकर स्पष्ट संकल्प लें —
    “मैं अमुक उद्देश्य से, पूर्ण श्रद्धा और नियम के साथ इस चौपाई का जप करूँगा।”

2. शुभ दिन और समय

  • मंगलवार या शनिवार आरंभ के लिए शुभ माने जाते हैं।

  • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या सूर्यास्त के बाद शांत समय उत्तम है।

  • एक ही समय नियमितता बनाए रखें।

3. जप संख्या और अवधि

  • प्रतिदिन 108 बार जप करना सामान्य परंपरा है।

  • 11, 21 या 40 दिनों का अनुष्ठान (मंडल) रखें।

  • तुलसी या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग कर सकते हैं।

 4. उच्चारण और भाव

  • शब्दों का शुद्ध उच्चारण करें।

  • केवल यांत्रिक जप नहीं, बल्कि अर्थ का चिंतन भी करें।

  • क्रोध, असत्य, नकारात्मकता से बचें — आचरण की शुद्धता आवश्यक है।

5. पूर्ण चालीसा का पाठ

जिस चौपाई को सिद्ध करना चाहते हैं, उसके साथ प्रतिदिन एक बार पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करें।
यह साधना को संतुलन देता है।

 6. आचरण संबंधी नियम

  • सात्विक भोजन रखें।

  • नशा, मांसाहार (यदि संभव हो तो) से परहेज करें।

  • सेवा और दान का भाव रखें — विशेषकर जरूरतमंदों की सहायता।

7. हवन या विशेष अनुष्ठान (वैकल्पिक)

यदि विस्तृत विधि से सिद्धि करनी हो तो किसी योग्य आचार्य/पंडित के मार्गदर्शन में छोटा हवन या सुंदरकांड पाठ कराया जा सकता है।

महत्वपूर्ण बात

  • “सिद्धि” का अर्थ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आत्मबल की वृद्धि है।

  • यह कोई त्वरित चमत्कार नहीं, बल्कि नियमित साधना का परिणाम है।

  • स्वास्थ्य या अन्य गंभीर समस्याओं में चिकित्सकीय/व्यावहारिक उपाय भी आवश्यक हैं।

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