लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर कड़ा हमला बोला। विधान परिषद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान किया गया व्यवहार न केवल राज्य के संवैधानिक प्रमुख का अपमान है, बल्कि महिलाओं की गरिमा के प्रति भी असम्मान दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी दल का आचरण लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण केवल औपचारिकता नहीं होता, बल्कि वह सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस संवैधानिक प्रक्रिया के दौरान व्यवधान उत्पन्न करना लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने विपक्ष के रवैये को अत्यंत निंदनीय बताते हुए कहा कि संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष का व्यवहार इस प्रकार का हो, तो उससे संवैधानिक मर्यादा की अपेक्षा करना व्यर्थ प्रतीत होता है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले नौ वर्षों के दौरान प्रदेश में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने परिवर्तन की एक लंबी यात्रा तय की है और राष्ट्र के साथ-साथ विश्व स्तर पर भी इस परिवर्तन को स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के कारण राज्य को अराजकता, अव्यवस्था और अपराध की ओर धकेल दिया था। उन्होंने कहा कि दो इंजन वाली सरकार की स्पष्ट नीतियों और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता के कारण उत्तर प्रदेश अब देश की अर्थव्यवस्था में बाधा नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण योगदान देने वाला राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश राजस्व घाटे से निकलकर राजस्व अधिशेष की दिशा में अग्रसर है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आज कानून का राज स्थापित है और रिकॉर्ड संख्या में पुलिस भर्तियां की गई हैं। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, युवाओं के लिए नई योजनाओं और आधुनिक पुलिस व्यवस्था के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि साइबर और फोरेंसिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ किया गया है। उन्होंने कहा कि शून्य सहिष्णुता की नीति ने उत्तर प्रदेश को नई पहचान दी है। मुख्यमंत्री के अनुसार 2017 के बाद से प्रदेश में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और त्योहारों व धार्मिक स्थलों से जुड़ी अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने माघ मेले का उदाहरण देते हुए कहा कि इस आयोजन के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया, जो प्रदेश की बेहतर व्यवस्थाओं का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर राष्ट्रीय नायकों और धार्मिक परंपराओं के प्रति असम्मान का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पूर्व में कुछ धार्मिक आयोजनों और परियोजनाओं का विरोध किया तथा राष्ट्रगान और वंदे मातरम जैसे प्रतीकों पर आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रगान या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान संविधान की भावना के विपरीत है और ऐसी मानसिकता लोकतंत्र को कमजोर करती है। बजट सत्र के पहले दिन हुए इस राजनीतिक टकराव ने प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। एक ओर सरकार इसे संवैधानिक मर्यादा और सुशासन का प्रश्न बता रही है, वहीं विपक्ष अपनी आपत्तियों को लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा बता रहा है। आने वाले दिनों में बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच यह टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।










