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सपा- राष्ट्रीय जनता दल में सबकुछ ठीक नहीं है, यूपी हो या बिहार, अब अस्तित्व कि लड़ाई

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पटना । बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव के निर्देश पर तीन विधायकों को पार्टी से निस्कासित कर दिया गया है, जिसमें से एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का पुत्र है। बिहार में हुई ये सियासी हलचल वैसे सामान्य घटना जरूर प्रतीत हो रही हो, लेकिन इसमें भविष्य में होने वाले राजनीतिक परिवर्तन की आहट सुनी जा सकती है। पिछले कुछ दशकों में क्षेत्रीय दलों को वर्चस्व बढ़ा था, वैसे ही यह धीरे-धीरे समाप्त होता भी दिखा है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि क्षेत्रीय दलों का अस्तित्व ही मिट जाएगा, अस्तित्व तो समाप्त नहीं हो सकता है, लेकिन भविष्य में उनके और कमजोर होने का अनुमान जरूर लगाया जा सकता है। चाहे यूपी की बात करे, या फिर बिहार की। यूपी में भी समाजवादी पार्टी से अलग हुए प्रभावशाली नेता शिवपाल सिंह यादव के सपा में वापसी के संकेत मिल रहे है, जो कि यह बताती है कि दल से जुड़े प्रभावशाली नेताओं को अहसास हो गया है कि दो वर्ष बाद होने वाले विधान चुनाव का नतीजा यदि इनके पक्ष में नहीं रहा तो भविष्य में उनके के अस्तित्व पर ही ग्रहण लग सकता है। कमोवेश ऐसी ही परिस्थिति बिहार में भी कही जा सकती है, लेकिन वहां की सियासत में थोड़ा अंतर यह है कि वहां पर राष्ट्रीय जनता दल में अंतर्कलह होने के बाबजूद नेतृत्व को लेकर बहुत ज्यादा मतभेद नहीं है, लेकिन आने वाले दिनों में यही पार्टी से निकाले गए नेता पार्टीं के लिए खतरनाक साबित हो सकते है, क्योंकि राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस हो या भाजपा, वह हालात नहीं बनने देंगी, जिसकी वजह से दशकों तक यह क्षेत्रीय दल इन प्रदशों की सियासत के केंद्र बिंदु में रहें। राष्ट्रीय जनता दल ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण आज अपने तीन विधायकों को छह वर्ष के लिए दल से निष्कासित कर दिया ।

राजद के प्रधान महासचिव आलोक मेहता ने यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के निर्देश पर पार्टी के तीन विधायकों को दल विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण छह वर्ष के लिए दल से निष्कासित कर दिया गया है । उन्होंने कहा कि जिन विधायकों को पार्टी से निष्कासित किया गया है उनमें पातेपुर विधानसभा क्षेत्र से 2015 में चुनाव जीतने वाली प्रेमा चौधरी, केवटी से विधायक फराज फातमी और गायघाट से विधायक महेश्वर प्रसाद यादव शामिल है।
इस बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी के पुत्र और केवटी से विधायक फराज फातमी ने कहा कि राजद का अल्पसंख्यकों के हितों से कोई सरोकार नहीं है । अब यह पार्टी अल्पसंख्यकों का इस्तेमाल सिर्फ वोट के लिए करती है और उसके नेताओं को कुचल रही है ।
श्री फातमी ने कहा कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव प्रचार किया था लेकिन पार्टी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की । उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए सदैव समर्पित रहने वाले उनके पिता एम एफ फातमी की क्या गलती थी जिसके कारण उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में दरभंगा से पार्टी का उम्मीदवार नहीं बनाया गया।

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