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 विष्णु को समर्पित गुरु पूर्णिमा : गुरु-शिष्य परंपरा का दिव्य महापर्व

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गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन संस्कृति की वह पुण्य तिथि है, जब समस्त सृष्टि गुरु के चरणों में नतमस्तक होकर कृतज्ञता अर्पित करती है। यह दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले गुरु तत्व के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आभार का महोत्सव है।

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है—
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः”,
अर्थात गुरु स्वयं भगवान विष्णु के स्वरूप हैं, जो सृष्टि का पालन करते हुए शिष्य को ज्ञान, विवेक और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

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  • भगवान विष्णु को समर्पित यह पावन गुरु पूर्णिमा हमें स्मरण कराती है कि अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश तक की यात्रा गुरु के बिना अधूरी है। गुरु वह दिव्य दीपक हैं, जो जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सत्य, सेवा, संस्कार और कर्तव्य का प्रकाश फैलाते हैं। भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग भी गुरु ही प्रशस्त करते हैं

इस शुभ अवसर पर देश-विदेश में बसे श्रद्धालु, संत-महात्मा, आचार्य, शिक्षक और मार्गदर्शक अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हैं। गुरु पूर्णिमा समाज को यह सशक्त संदेश देती है कि राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना और नैतिक मूल्यों की स्थापना तभी संभव है, जब गुरु-शिष्य परंपरा जीवंत और सुदृढ़ बनी रहे

गुरु पूर्णिमा के इस पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। आइए, हम सभी अपने गुरुओं के आदर्शों को जीवन में आत्मसात कर, सेवा, संस्कार, धर्म और राष्ट्रहित के मार्ग पर संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ें—यही इस दिव्य पर्व का वास्तविक संदेश है।

✍️ प्रस्तुति /मनोज श्रीवास्तव

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