ताली बजाने या करतल ध्वनि को समानतः धार्मिक भजन-कीर्तन का एक अंग माना गया है।
यह भक्तिभाव सम्प्रेषित करता है ही, इसके वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय लाभ भी हैं। ताली-व्यायाम को नये रूप में जन्म देनेवाले ‘लिंकन बुक ऑफ रिकार्ड्स’ 1995 के संस्करण में अपना नाम दर्ज करानेवाले श्री फूलचन्द बजाज जी ने इसके द्वारा न केवल अपने आपको स्वस्थ किया, अपितु अन्य हजारों लोगों को भी प्रेरणा दी।
तालियों का शरीर पर प्रभाव
तालियाँ बजाने के 4-5 मिनट के अंदर शरीर का रक्त गर्म होना शुरू हो जाता है, जिसकी वजह से सर्दियाँ कम तथा गर्मियाँ अधिक सुखी आने लगती हैं। यह गर्म रक्त सिर से लेकर पैर तक जाता है। समस्त नाड़ियों में तेज़ प्रवाह से दौड़ने लगता है, जिससे यह ऊष्ण रक्त नाड़ियों में जमे मलदोष, खून की गांठें और गंदगी (विकार) को पिघलाते हुए बहाने लगता है।
इसी गर्म खून के कारण शरीर के रोम-छिद्र खुल जाते हैं, जिससे खुलकर पसीना आता है। शरीर की समस्त गंदगी पसीने के साथ बाहर निकल जाती है। हार्ट अटैक का खतरा टल जाता है, श्वास लेने की क्षमता बढ़ जाती है। फेफड़ों के समस्त पंप तथा वाल्व ठीक तरह से कार्य करने लगते हैं। इन बीमारियों के अतिरिक्त अन्य तमाम बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है।
तालियाँ बजाने की तकनीक
तालियाँ बजाने का अभ्यास करते समय दोनों हाथों की बीच में 12 सेमी से 20 सेमी का फासला रखते हुए, दोनों हाथों को सीधा करके बाजुओं को ढीला और हल्का छोड़कर आमने-सामने रखें, दोनों हथेलियों को आपस में टकराएं, जिससे दोनों हाथों के एक्युप्रेशर बिंदुओं पर दबाव पड़ता है।
धीरे-धीरे तालियाँ बजाने की गति को बढ़ाते जाएं। पहले दिन आप सामर्थ्यानुसार ताली बजायें, फिर दिन-प्रतिदिन इसकी संख्या बढ़ाते जाएं। तालियों के अभ्यास में यदि आप थक जाएं या श्वास फूलने लगे, तो घबराएं नहीं। थोड़ी देर विश्राम करें, फिर पुनः ताली बजायें। 10-15 दिनों में ही आप ताली बजाने के क्रिया से अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन देखेंगे।
सावधानियाँ
❀ तालियों का अभ्यास आरंभ करने से पहले दोनों हाथों पर सरसों या नारियल का तेल अवश्य लगाएं, जिससे हाथों और शरीर की गर्मी की तेल से क्षति न हो।
❀ जुते और मोज़े जरूर पहनें, ताकि तालियों के बजाने में उत्पन्न होनेवाली विद्युत ऊर्जा शरीर में ही दौड़ती रहे।
❀ ताली बजाना बंद करने के बाद 20 मिनट तक हाथों को न धोएं।
❀ दोनों हाथों के नाखून कटे होने चाहिए।
❀ यदि आप दवाइयाँ ले रहे हैं, तो उन्हें एकदम से न छोड़ें; धीरे-धीरे स्वतः छूट जाएंगी।
❀ पंखे और ए.सी. में ताली बजाने से उष्णता नहीं आती, अतः लाभ नहीं मिलता।
❀ दाएँ हाथ की बाँयी हथेली पर तथा बाँए हाथ की दायी हथेली पर चोट मारकर ताली न बजाएं। इससे हाथों की नसें दब जाती हैं और रक्त संचार बिगड़ सकता है, जिससे अन्य बीमारियों का खतरा हो सकता है।
❀ दोनों हथेलियों से समान रूप से ताली बजाने का अभ्यास करें।
तालियों से ठीक होनेवाली बीमारियाँ
❀ रूसी, बालों का झड़ना, गंजापन, बालों का असमय सफेद होना।
❀ सिर तथा माथे का हल्का दर्द ठीक होता है।
❀ दिमागी कमजोरी और थकावट दूर हो जाती है।
❀ नज़ला, जुकाम, नाक बंद होना, खांसी, सांस फूलने की समस्या दूर होती है।
❀ गैस बनने और भूख न लगने की समस्या में लाभ मिलता है।
❀ आँखों के रोग जैसे – दृष्टिदोष, धुंधलापन।
❀ बुखार, जोड़ों का दर्द ठीक होने में मदद मिलती है।
❀ फेफड़े, लिवर, छाती, पेट एवं आँतों को शक्ति मिलती है।
❀ मोटापा, बार-बार पेशाब जाना, कब्ज़ और स्वप्नदोष की समस्या दूर होती है।
परहेज़
मदिरा, धूम्रपान आदि मादक पदार्थ, अधिक तेल-मसाले वाले खाद्य पदार्थ, चीनी, नमक, रिफाइंड, मैदा और पॉलिश किया चावल न लें — ये सातों चीज़ें स्वास्थ्य की दुश्मन हैं।
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ताली बजाने का ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कोई सीधा और परंपरागत उल्लेख नहीं है, लेकिन भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्म में इसके सूक्ष्म प्रभावों को ज़रूर माना गया है। आइए समझते हैं:
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1. ताली और ऊर्जा (ऊर्जात्मक दृष्टिकोण)
जब हम ताली बजाते हैं, तो हमारी हथेलियों के विभिन्न एक्यूप्रेशर पॉइंट्स (pressure points) सक्रिय होते हैं।
ये पॉइंट्स शरीर के नर्वस सिस्टम, लीवर, दिल, और पाचन तंत्र से जुड़े होते हैं।
इसे वैदिक चिकित्सा में ऊर्जा जागरण से जोड़ा जाता है, जो व्यक्ति की आभा (aura) को मजबूत कर सकता है।
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2. ज्योतिष में ग्रह और ध्वनि
कुछ विद्वानों का मानना है कि ताली बजाने से सकारात्मक कंपन (vibrations) उत्पन्न होते हैं जो नकारात्मक ग्रहों (जैसे राहु, केतु, शनि) के प्रभाव को कुछ हद तक शांत कर सकते हैं।
जैसे शनि पूजा में ताली बजाना या ढोलक बजाना भी देखा गया है — इससे ऊर्जा का संचार होता है।
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3. धार्मिक अनुष्ठानों में ताली
कीर्तन, भजन, आरती के समय ताली बजाना एक आम परंपरा है।
यह वातावरण को शुद्ध करता है, और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है — जोकि किसी भी ज्योतिष दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है।
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4. ताली और ग्रह दोष निवारण (अप्रत्यक्ष रूप से)
किसी व्यक्ति की कुंडली में अगर कमजोर बुध (संचार) या शनि (शारीरिक ऊर्जा) हो, तो ताली जैसे व्यायाम उन्हें ऊर्जा प्रदान करते हैं।
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निष्कर्ष:
ताली बजाने का ज्योतिष में सीधा उल्लेख नहीं है, लेकिन यह एक ऊर्जात्मक अभ्यास है जो शरीर, मन और वातावरण को सकारात्मकता से भरता है। कुछ हद तक यह ग्रहों की शांति में सहायक हो सकता है, विशेषतः जब भक्ति या पूजा के साथ किया जाए।
शिवलिंग की पूजा करने से ही पार्वती−परमेश्वर दोनों की पूजा, धातु से बने शिवलिंग और प्राण प्रतिष्ठा ?










