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गाजियाबाद में यशोदा मेडिसिटी: रोगियों की उम्मीदों और डॉक्टरों की मेहनत का संगम

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गाजियाबाद, 26 अक्टूबर (एजेंसियां)। गाजियाबाद की सुबह आज कुछ अलग थी। शहर की धड़कनें और भी तेज थीं, क्योंकि 1200 बेड की यशोदा मेडिसिटी के उद्घाटन का समय आ गया था। इस अस्पताल की छत के नीचे अब वह सभी सुविधाएं मौजूद हैं, जिनके लिए लोग दशकों तक इंतजार करते आए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से इस अत्याधुनिक अस्पताल का उद्घाटन किया, लेकिन इसके पीछे की कहानी केवल शिलाओं और मशीनों की नहीं है—यह उन लाखों लोगों की उम्मीदों और डॉक्टरों के अथक प्रयासों की कहानी है।


💉 “हर मरीज की मुस्कान ही हमारा लक्ष्य है”

डॉ. पी.एन. अरोड़ा, यशोदा मेडिसिटी के संस्थापक, बताते हैं कि इस अस्पताल का निर्माण केवल भव्यता के लिए नहीं किया गया। उनका कहना है —

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“हमारा लक्ष्य है कि कोई भी रोगी अपने जीवन में इलाज के लिए विदेश या दूर-दराज के शहरों में न जाए। यहां सब कुछ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगा—कैंसर, हृदय, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक, रोबोटिक सर्जरी… सब।”

डॉ. अरोड़ा की टीम ने तीन वर्षों की मेहनत में इस विशाल संस्थान को तैयार किया, हर कमरे, हर ICU बेड, और हर ऑपरेशन थिएटर में मरीजों के स्वास्थ्य और आराम को प्राथमिकता दी।


🌸 मरीजों की उम्मीदों का केंद्र

यशोदा मेडिसिटी में हर दिन मरीज और उनके परिवार आने वाले वर्षों के लिए उम्मीदों के साथ आते हैं। एक 55 वर्षीय कैंसर रोगी, जो पिछले कई महीनों से इलाज की तलाश में थे, आज इस अस्पताल में पहली बार अपने इलाज की योजना बनाते समय राहत की सांस ले रहे थे। उनकी पत्नी ने कहा —

“अब हमें बाहर जाने की चिंता नहीं। हमारा बेटा भी अब यहां सुरक्षित महसूस करता है। डॉक्टरों का भरोसा और उनका समर्पण ही हमें उम्मीद दे रहा है।”


⚕️ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का समर्पण

यशोदा मेडिसिटी सिर्फ मशीनों का संग्रहालय नहीं है। यहां 5,000 से अधिक डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ हर दिन मरीजों के जीवन के लिए जूझ रहे हैं। डॉक्टर उपासना अरोड़ा, प्रबंध निदेशक, बताती हैं —

“हम यहां केवल रोगी का इलाज नहीं करते, बल्कि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखते हैं। मरीजों की उम्मीदें, उनके डर, उनके सवाल—हमारे काम का हिस्सा हैं।”

संस्थान में टीबी, सिकिल सेल एनीमिया और कैंसर जैसे गंभीर रोगों पर लगातार अनुसंधान चल रहा है। यहां का जीन थैरेपी लैब और रोबोटिक सर्जरी केंद्र इसे उत्तर भारत में विशेष बनाते हैं।


🏥 कोविड और टीबी: सेवा की मिसाल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि कोविड महामारी के दौरान यशोदा अस्पताल ने जिस समर्पण के साथ मरीजों का इलाज किया, वह अनुकरणीय है। टीबी उन्मूलन और स्टेप्स प्रोजेक्ट के माध्यम से समाज के पिछड़े वर्गों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना संस्थान की प्राथमिकता है।


🌟 सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अस्पताल न केवल मरीजों के लिए वरदान है, बल्कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि अब नागरिकों को दुनिया के अन्य देशों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से सुधार हो रहा है, और यशोदा मेडिसिटी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है।


💖 मानवता और तकनीक का संगम

यशोदा मेडिसिटी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि तकनीक और मानवता साथ-साथ चल सकती हैं। यहां हर मरीज को चिकित्सकीय दृष्टि से उच्च गुणवत्ता की सेवा देने के साथ-साथ उसकी भावनात्मक सुरक्षा और सहानुभूति भी मिलती है। यही कारण है कि यह केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि आशा और विश्वास का प्रतीक बन गया है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा —

“स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र की नींव हैं। यशोदा मेडिसिटी इस दिशा में नए मानक स्थापित कर रहा है।”

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