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रिश्तेदारी की ज़िद ने पाकिस्तान को बनाया ‘जेनेटिक बीमारियों की प्रयोगशाला’

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नई दिल्ली, 20 जनवरी,(एजेंसियां)। पाकिस्तान आज केवल आर्थिक बदहाली या राजनीतिक अस्थिरता से ही नहीं जूझ रहा, बल्कि एक ऐसे खामोश संकट की चपेट में है, जो उसकी आने वाली पीढ़ियों को अंदर से खोखला कर रहा है।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) और पाकिस्तान के अपने चिकित्सा शोध संस्थानों की रिपोर्टें यह चेतावनी दे चुकी हैं कि रिश्तेदारी, विशेषकर चचेरे-ममेरे भाई-बहनों में लगातार होने वाली शादियाँ, देश को गंभीर जेनेटिक बीमारियों की ओर धकेल रही हैं।पाकिस्तान में आज भी करीब 60 से 70 प्रतिशत शादियाँ नज़दीकी रिश्तों में होती हैं। यह केवल सामाजिक परंपरा नहीं रही, बल्कि अब एक वैज्ञानिक रूप से सिद्ध स्वास्थ्य खतरा बन चुकी है।

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मेडिकल शोध बताते हैं कि एक ही परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी विवाह करने से खराब और कमजोर जीन लगातार दोहराए जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे जन्म से ही ऐसी बीमारियों के साथ पैदा हो रहे हैं, जिनका इलाज या तो बेहद महंगा है या फिर संभव ही नहीं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट साफ कहती है कि पाकिस्तान में जन्मजात विकृतियों, मानसिक मंदता, जन्म से बहरापन, आंखों की कमजोरी और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामलों में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनमें से अधिकांश मामलों का संबंध सीधे तौर पर कज़िन मैरिज से पाया गया है। पाकिस्तान बायोमेडिकल जर्नल और स्थानीय मेडिकल संस्थानों ने तो इस स्थिति को ‘जेनेटिक टाइम बम’ तक करार दे दिया है, जो हर नई पीढ़ी के साथ और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है।

थैलेसीमिया इसका सबसे भयावह उदाहरण है। पाकिस्तान आज दुनिया के उन देशों में गिना जाता है जहाँ थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। रिपोर्टें बताती हैं कि इस बीमारी के पीछे भी रिश्तेदारी में विवाह एक बड़ा कारण है। हर साल हजारों बच्चे इस लाइलाज बीमारी के साथ जन्म लेते हैं, जिन्हें जीवन भर खून चढ़ाने और महंगे इलाज पर निर्भर रहना पड़ता है। सवाल यह है कि क्या इसे केवल ‘परंपरा’ कहकर नजरअंदाज किया जा सकता है?

पाकिस्तान के सरकारी और निजी अस्पतालों में ऐसे बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिन्हें विशेष देखभाल, मानसिक सहयोग और आजीवन चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। लेकिन देश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था इस बोझ को उठाने में असमर्थ नजर आती है। इसका सीधा असर न केवल परिवारों पर पड़ रहा है, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के शिक्षित और शहरी युवाओं में अब इस परंपरा के खिलाफ सवाल उठने लगे हैं। कई युवा जेनेटिक काउंसलिंग और मेडिकल जांच के बाद रिश्तेदारी में शादी से इनकार कर रहे हैं। इसके बावजूद ग्रामीण इलाकों और कट्टर सामाजिक ढांचे में आज भी सामाजिक दबाव, तथाकथित इज्जत और परंपरा के नाम पर इस प्रथा को ढोया जा रहा है, चाहे उसकी कीमत बच्चों का भविष्य ही क्यों न हो।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यदि पाकिस्तान ने समय रहते इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले दशकों में देश को एक ऐसे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ेगा, जिससे निकलना आसान नहीं होगा। रिपोर्टें यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि यह मसला धर्म या संस्कृति का नहीं, बल्कि विज्ञान, स्वास्थ्य और मानव भविष्य का है। अब फैसला पाकिस्तान को करना है कि वह परंपरा के नाम पर अगली पीढ़ियों को बीमार बनाता रहेगा या समय रहते इस खतरनाक चक्र को तोड़ेगा। رشتہ داری کے اصرار نے پاکستان کو ‘جینیاتی امراض کی تجربہ گاہ’ بنا دیا

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