Advertisement
Home Religious Dharm-Sanskriti जहां अमृत की बूंदें गिरीं, वहां मनाया जाता है कुंभ

जहां अमृत की बूंदें गिरीं, वहां मनाया जाता है कुंभ

0
1394

कुंभ मेला या पर्व का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। यह पर्व हरिद्बार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक मनाने की परम्परा दीर्घ काल से चली आ रही है। कुंभ का पर्व चंद्रमा, सूर्य और बृहस्पति ग्रहों के संयोग से होता है। इन चारों तीर्थों पर अलग-अलग राशि में जब ये ग्रह एकत्रित होते हैं, तब कुंभ पर्व मनाया जाता है, इसलिए इसका महत्व भिन्न-भिन्न है, कुंभ पर्व हर 12 वर्ष बाद होता है।

छह वर्ष बाद होने वाले को अर्धकुंभ कहते हैं। इस पर्व पर तीर्थ स्थल में स्नान, दान और सत्संग आदि का विशेष महत्व होता है, कुंभ तीर्थ हमारे देश के की चारों दिशाओं में हैं। नासिक कुंभ का मेला विशाल होता है। इस अवसर पर देशभर से लोग यहां एकत्र होते हैं, इसके आयोजन के पीछे जो कथा है, वह इस प्रकार है- एक बार सुर और असुरों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। मंथन करते समय भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर समुद्र से निकले। उस अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद हो गया।

Advertisment

दोनों ही उस घड़े को हथियाने के चक्कर में लग गए। इस बीच देवराज इंद्र के पुत्र जयंत अमृत कलश का अपहरण कर के भाग गये। इस पर देवताओं और असुरों ने उनका पीछा किया। इस दौरान इसे लेकर देवताओं व असुरों के बीच 12 वर्ष तक घमासान युद्ध होता रहा। इस अवधि में अमृत कलश को हरिद्बार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में उठाया और रखा गया। इस दौरान कलश से अमृत की कुछ बूंदे इन स्थानों पर छलक कर गिर गईं, इसलिए इन स्थानों पर कुंभ का पर्व मनाया जाता है। पर्व के मौके पर देशभर से साधु महात्माओं और नागा साधुओं की शोभायात्राएं निकलती हैं। यह देश की संस्कृति को देखने व समझने का एक उत्तम अवसर होता है। सात्विक विचार लेकर इस पर्व में शामिल होने और यहां ·ान व ध्यान आदि करने से अतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है।

पाँच एक-लाइन प्वाइंट्स:

  1. समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से गिरी बूंदों के कारण चार पवित्र स्थलों पर कुंभ का आयोजन होता है।

  2. कुम्भ दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम माना जाता है।

  3. प्रयोगराज, हरिद्वार, उज्जेन और नासिक में क्रमवार इसका आयोजन होता है।

  4. मान्यता है कि कुंभ स्नान से पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  5. साधु-संतों, अखाड़ों और करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इसे आस्था का महासंगम बनाती है।

#कुंभ_मेला, #अमृत_कथा, #समुद्र_मंथन, #आस्था_का_संगम, #सनातन_परंपरा

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here