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अरावली बचाओ आंदोलन: सीपीआई का राष्ट्रीय आह्वान, जन–मार्च स्थगित

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लखनऊ। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन द्वारा पार्टी के पर्यावरण संरक्षण और अरावली बचाओ के राष्ट्रीय आह्वान के तहत कई गाँवों में जन–मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी। इसी क्रम में देवरी गाँव से मार्च की शुरुआत प्रस्तावित थी, लेकिन मार्च आरंभ होने से ठीक पहले पार्टी को एक अत्यंत दुखद सूचना प्राप्त हुई। बन्नौर ब्रांच के सचिव कॉमरेड रमेश शर्मा के युवा पुत्र अनुज के निधन के कारण आज का जन–मार्च स्थगित कर दिया गया।

पार्टी ने इस शोक के अवसर पर उत्तर प्रदेश और देश की वर्तमान स्थिति की दोहरी सच्चाई को सामने रखा। सीपीआई(एमएल) का कहना है कि आज एक ओर पर्यावरण पर सुनियोजित हमले तेज़ हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। ये दोनों संकट अलग–अलग नहीं, बल्कि एक ही राजनीतिक–आर्थिक सोच का परिणाम हैं।

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पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि अरावली पर्वतमाला को कॉरपोरेट खनन परियोजनाओं के लिए खोला गया—भले ही सरकार इसकी परिभाषा बदलने के दावे करे—तो इसके दूरगामी और गंभीर दुष्परिणाम होंगे। अरावली पर्वतमाला थार मरुस्थल से आने वाली गर्म और रेतीली हवाओं को उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पहुँचने से रोकती है। यही प्राकृतिक ढाल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और कृषि के अनुकूल जलवायु सुनिश्चित करने में सहायक है। अरावली के विनाश से उत्तर प्रदेश की जलवायु प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर खेती और विशेषकर छोटे व सीमांत किसानों पर पड़ेगा।

दूसरी ओर, यही किसान और मेहनतकश परिवार बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, समय पर जाँच की अनुपलब्धता और महँगा निजी इलाज आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। अनुज की असमय मृत्यु को पार्टी ने इसी विफल स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रतीक बताया।

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने स्पष्ट किया कि आज का जन–मार्च स्थगित होना किसी भी तरह से आंदोलन से पीछे हटना नहीं है, बल्कि यह एक ठहराव है जो संघर्ष के संकल्प को और मज़बूत करता है। पार्टी ने दोहराया कि अरावली को बचाने की लड़ाई और जन–स्वास्थ्य के अधिकार की लड़ाई अविभाज्य हैं, और इन दोनों मुद्दों पर संघर्ष आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

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