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राजस्थान का खाटू श्याम मंदिर

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राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गांव में स्थित खाटू श्याम मंदिर महाभारत के पात्र बर्बरीक (भीम के पौत्र) के अवतार को समर्पित एक प्रसिध्द तीर्थस्थल है। पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध से पहले भीम के पोते बर्बरीक ने धर्म बनाए रखने के लिए अपना सिर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित कर दिया था और श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में उनका नाम श्याम रहेगा और उनके भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होंगी। राजस्थान में खाटू श्याम मंदिर को खाटू धाम के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में अत्यंत लोकप्रिय है; दूर-दूर से करोड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

कथानुसार बर्बरीक ने श्रीकृष्ण को शीशदान कर महाभारत का युद्ध देखते रहने की इच्छा जताई, जिससे प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि उनके भक्त उनकी मनोकामनाएँ पूरी पाएंगे। इस पवित्र स्थल पर मूल मंदिर का निर्माण 1027 ईस्वी में राजा रूप सिंह चौहान ने करवाया था। बाद में सत्रहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में इसकी मरम्मत और विस्तार होता रहा। मंदिर परिसर में एक पवित्र कुंड श्री श्याम कुंड भी है, जिसमें स्नान करने से रोग-व्याधियाँ दूर होने तथा स्वास्थ्य लाभ की मान्यता है।

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खाटू श्याम मंदिर मुख्य भवन सफेद मकराना संगमरमर से निर्मित है तथा पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य शैली की उत्कृष्टता दर्शाता है। मंदिर के गर्भगृह का बाहरी भाग सीधा-सादा है, लेकिन भीतरी दीवारों पर भगवान श्यामजी और महाभारत की कथानकों से संबंधित भव्य भित्ति-चित्र बने हुए हैं (चित्र में श्री कृष्ण और बर्बरीक की मूर्ति देखी जा सकती है)। प्रवेश द्वार तथा गुंबदों पर झंडों और फूलों के अलंकरण हैं, और गर्भगृह के द्वारों पर चांदी की पट्टियाँ चढ़ायी गई हैं। मंदिर के भीतरी हॉल (जगमोहन) की दीवारों पर मिथकीय दृश्यों की कलाकृतियाँ उकेरी गई हैं। इस सुंदर वास्तुकला और चित्रकारी के चलते हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं।

मेले और त्योहार

खाटू श्याम मंदिर में प्रतिवर्ष अनेक मेले एवं उत्सव मनाए जाते हैं। प्रमुख हैं:

  • फाल्गुन मास की एकादशी (लक्खी मेला) – यह सबसे बड़ा मेला है जिसमें फरवरी–मार्च में महर्षि भक्ति से भरे माह की एकादशी को लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं। इस अवसर पर रींगस से करीब 17 किमी लंबी पदयात्रा (निशान यात्रा) निकाली जाती है, जिसमें भक्त नारंगी तिरंगा निशान लेकर मंदिर पहुंचते हैं और उसकी सेवा करते हैं।

  • जन्माष्टमी, दीपावली, ग्यारस आदि पर्व – भगवान कृष्ण और हिन्दू त्योहारों के अवसर पर भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है।

  • देवउठनी एकादशी (खाटू श्याम जन्मोत्सव) – कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को खाटू श्याम का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे भक्त प्राकट्य दिवस के रूप में मानते हैं।

भक्त आस्था और पूजा-पद्धति

खाटू श्याम मंदिर में भक्तजन अत्यंत आस्था से पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में प्रतिदिन पाँच प्रमुख आरतियाँ होती हैं – मंगल, श्रृंगार, भोग, संध्या और शयन आरती। इन आरतियों में झांकी सजाई जाती है और भजन-कीर्तन करते हुए भक्ति भाव पाया जाता है। मंदिर के समीप स्थित श्याम कुंड में स्नान करने की भी परंपरा है; मान्यता है कि कुंड में स्नान करने से रोग दूर होते हैं और स्वास्थ्य लाभ होता है।

भक्तों का विश्वास है कि खाटू श्याम जी कलियुग के देवता हैं और “हारे का सहारा” कहे जाते हैं। यहां आकर जो श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पूजा करते हैं, उन्हें बाबा ने पूर्ण किया है और भक्तों को आशीर्वाद मिलता है। इसलिए लाखों श्रद्धालु वर्ष भर बाबा के दर्शन एवं सेवा के लिए आते रहते हैं।

अन्य खाटू श्याम मंदिर (राजस्थान में)

राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग की सूची में खाटू श्याम जी का मुख्य व ऐतिहासिक मंदिर केवल सीकर जिले, खाटू धाम में दर्ज है। अन्य स्थानों पर तुलनात्मक रूप से खाटू श्याम के मंदिर नगण्य हैं और उनकी प्रतिष्ठा इस मुख्य मंदिर जितनी नहीं है। यही कारण है कि खाटूवाले मंदिर को राज्य का सबसे बड़ा खाटू श्याम केंद्र माना जाता है।

स्रोत: राजस्थान पर्यटन विभाग तथा मान्य समाचार और पौराणिक ग्रंथों के वर्णनानुसार खाटू श्याम मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारी तैयार की गई है

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