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स्टालिन के बयान पर मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

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सनातन धर्म पर बयान को बताया ‘हेट स्पीच’ और ‘जनसंहार का संकेत’

चेन्नई, 21 जनवरी (एजेंसियां)। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार में युवा कल्याण एवं खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस बयान को न सिर्फ हेट स्पीच करार दिया, बल्कि इसे जनसंहार की ओर इशारा करने वाला वक्तव्य बताया है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के बयान भारतीय संविधान की भावना के विरुद्ध हैं और समाज में सांस्कृतिक व धार्मिक संतुलन को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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मामले की सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सनातन धर्म को बीमारी या उसे समाप्त किए जाने की बात कहना केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता, बल्कि यह एक पूरे धार्मिक समुदाय के अस्तित्व पर हमला है। अदालत ने कहा कि भारत जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक देश में किसी भी धर्म को खत्म करने की बात करना संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “जब कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक मंच से किसी धर्म के उन्मूलन की बात करता है, तो उसका प्रभाव केवल भाषण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह समाज में नफरत, टकराव और अस्थिरता को जन्म देता है।” अदालत ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक उन्मूलन की श्रेणी में आने वाला वक्तव्य माना।

हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि उदयनिधि स्टालिन एक जिम्मेदार संवैधानिक पद पर आसीन हैं और उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने शब्दों के प्रभाव को समझें। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और आलोचना का अधिकार है, लेकिन किसी धर्म विशेष के खिलाफ हिंसात्मक या उन्मूलनकारी भाषा का प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

सुनवाई के दौरान यह दलील भी सामने आई कि ऐसे बयान समाज में पहले से मौजूद तनाव को और भड़काने का काम करते हैं। अदालत ने माना कि सनातन धर्म करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसके खिलाफ इस प्रकार की भाषा सीधे तौर पर एक बड़े समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली है।

मद्रास हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को देशभर में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा, धार्मिक सहिष्णुता और संवैधानिक जिम्मेदारी जैसे बड़े सवालों से जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी भविष्य में इस तरह के विवादित बयानों पर एक नज़ीर के रूप में काम कर सकती है।

फिलहाल, अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं समर्थकों की ओर से बयान को संदर्भ से काटकर पेश किए जाने की दलील दी जा रही है। हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट का रुख साफ है कि धार्मिक उन्मूलन जैसी सोच को किसी भी रूप में वैध नहीं ठहराया जा सकता

स्टालिन ने आखिर कहा क्या था 

तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सितंबर 2023 में चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म को लेकर यह विवादित बयान दिया था।  उन्होंने कहा था कि सनातन धर्म समाज के लिए डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारी है और जिस तरह इन बीमारियों का इलाज करके उन्हें खत्म किया जाता है, उसी तरह सनातन धर्म को भी समाप्त किया जाना चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ चीजों का “विरोध” करना काफी नहीं होता, बल्कि उन्हें “समूल नष्ट” करना पड़ता है। इसी संदर्भ में उन्होंने सनातन धर्म का नाम लिया। स्टालिन का तर्क यह था कि सनातन धर्म जातिवाद, असमानता और सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देता है, इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने बाद में यह सफाई दी कि उनका इशारा किसी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ हिंसा की ओर नहीं था, बल्कि वे “विचारधारा” की आलोचना कर रहे थे। लेकिन उनके बयान में प्रयुक्त शब्द—
“बीमारी”, “खत्म करना”, “उन्मूलन”
को लेकर ही विवाद खड़ा हुआ। कानूनी और सामाजिक स्तर पर यही कहा गया कि

  • किसी धर्म की तुलना बीमारी से करना

  • और उसे समाप्त करने की बात कहना
    सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि हेट स्पीच और जनसंहार जैसी मानसिकता का संकेत माना जा सकता है।

इसी बयान को आधार बनाकर याचिकाएं दाखिल हुईं और बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की भाषा संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है।

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