Advertisement
Home Local News महाकुम्भ के मुरीद हुए विदेश से आए संत

महाकुम्भ के मुरीद हुए विदेश से आए संत

0
213
paavan sapt sarita mein godaavaree: mahaapunyadaayee

महाकुम्भ के मुरीद हुए विदेश से आए संत

*जापान, स्पेन और नेपाल से आए विदेशी संतों को रास आ रहा है सनातन संस्कृति का महापर्व महाकुम्भ*

Advertisment

*सरकार के अतिथि देवो भव: के संस्कार से भाव विभोर है आगंतुक, व्यवस्थित आयोजन पर हर्षित है मेहमान*

*महाकुम्भ के दौरान अपने गुरुओं के साथ करेंगे पुण्य भूमि में साधना*

*महाकुम्भ नगर। प्रयागराज महाकुम्भ के आयोजन के पहले महाकुम्भ नगर में देश के कोने कोने से आए साधुओं के अलावा विदेश से भी साधु संतों के आने का सिलसिला तेज होता जा रहा है। अखाड़ों की धर्म ध्वजा, नगर प्रवेश और कुम्भ छावनी प्रवेश यात्रा की परंपरा में महाकुंभ पहुंचे इन विदेशी साधु संतों को भी महाकुम्भ की नव्य व्यवस्था रास आ रही है।

*विदेशी संतों को रास आ रहा है धरातल पर उतर रहा दिव्य, भव्य और व्यवस्थित महाकुम्भ*
प्रयागराज महाकुम्भ के आयोजन की तिथि जैसे जैसे निकट आ रही है महाकुंभ क्षेत्र के अखाड़ा सेक्टर में साधु संतों की मौजूदगी बढ़ती जा रही है। देश विदेश से साधु संतो की आवक होने लगी है। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की छावनी प्रवेश यात्रा में शामिल होने आए विदेशी संतों को महाकुम्भ रास आ रहा है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर सोम गिरी उर्फ पायलट बाबा की जापानी शिष्या योग माता एवं महामंडलेश्वर केको कई जापानी साध्वी के साथ छावनी प्रवेश में शामिल हुईं। उनका कहना है कि जूना अखाड़े की छावनी प्रवेश यात्रा से आगामी महाकुंभ के आयोजन का अंदाजा लगने लगा है। एयर कनेक्टिविटी से लेकर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था अच्छी है। नेपाल से आई महिला संत और जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर हेमा नन्द गिरी का कहना है कि संतों का सौभाग्य है कि जिस प्रदेश में महाकुम्भ का आयोजन हो रहा है, वहां के मुख्यमंत्री भी एक संत हैं। योगी जी की तरफ से जिस तरह भव्य और दिव्य महाकुम्भ के आयोजन का संकल्प लेकर आयोजना की तैयारियां चल रही हैं उससे सनातन धर्म का प्रचार प्रसार नेपाल सहित दुनिया के विभिन्न देशों में अब तेजी से हो रहा है।

*स्वच्छ और डिजिटल महाकुम्भ से विदेशी संत भी खुश*
प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता प्रयागराज महाकुम्भ को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के साथ स्वच्छता और डिजिटलाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। विदेशी संत भी इससे खुश हैं। स्पेन से अखाड़ों के विभिन्न आयोजनों में हिस्सा लेने आई जूना अखाड़े की अवधूत अंजना गिरी जिनका पहले नाम एंजिला था का कहना है कि पिछले 30 बरस से वह लगातार महाकुम्भ अपने गुरु के साथ आती रही हैं। लेकिन इस बार महाकुम्भ की अनुभूति अलग है। सैनिटेशन पर फोकस किया गया है जिससे सभी जगह स्वच्छता है । इनफॉर्मेशन भी डिजिटल प्लेटफार्म पर मिल रही हैं जिससे बाहर के देशों से आने वाले श्रद्धालुओं और टूरिस्ट के लिए आसानी हो गई है। फ्रांस से महाकुम्भ में जूना अखाड़े के आयोजन में शामिल होने आए ब्रूनो गिरी कहना है कि महाकुम्भ के आयोजन में वह पहले भी दो बार आए चुके हैं लेकिन इस बार शहर बदला बदला सा लगता है , उत्सव की अनुभूति होती है।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here