नई दिल्ली, 8 जनवरी (एजेंसियां)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर गंभीर संवैधानिक और कानूनी विवाद के केंद्र में आ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कोलकाता में चल रही एक संवेदनशील तलाशी कार्रवाई में सीधे हस्तक्षेप करते हुए सबूत मिटाने की कोशिश की।
मामला अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां इस पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है।
ईडी के मुताबिक, शीर्ष राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC से जुड़े निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर जब तलाशी अभियान चल रहा था, उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारी पुलिस बल और सहयोगियों के साथ वहां पहुंचीं और महत्वपूर्ण भौतिक दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने साथ ले गईं।
⚖️ शांतिपूर्ण रेड, लेकिन CM की एंट्री से मचा हंगामा
ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले तक तलाशी की कार्यवाही पूरी तरह शांतिपूर्ण, कानूनी और पेशेवर तरीके से चल रही थी।
लेकिन जैसे ही ममता बनर्जी और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, हालात बदल गए। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री के काफिले ने न सिर्फ आवासीय परिसर में दखल दिया, बल्कि बाद में I-PAC के कार्यालय परिसर पहुंचकर वहां से भी जबर्दस्ती दस्तावेज और डिजिटल सबूत हटाए गए।
🚨 PMIए जांच में बाधा, कानून के शासन पर सवाल
ईडी ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री और उनके साथ मौजूद पुलिस अधिकारियों की इस कार्रवाई से मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई है।
जांच एजेंसी ने इसे संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करार देते हुए न्यायालय का रुख किया है।
📢 ED का स्पष्ट संदेश: न राजनीति, न चुनाव—सिर्फ कानून
मचे सियासी तूफान के बीच ईडी ने स्पष्ट किया कि—
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यह तलाशी किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाने के लिए नहीं है
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किसी पार्टी कार्यालय पर छापा नहीं मारा गया
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इसका चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है
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यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ नियमित और साक्ष्य-आधारित जांच का हिस्सा है
एजेंसी ने यह भी दोहराया कि तलाशी पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों के तहत की गई थी।
🏭 कोयला तस्करी कांड से जुड़ा है मामला
ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई सीबीआई की कोलकाता इकाई द्वारा दर्ज एफआईआर (27 नवंबर 2020) पर आधारित है, जिसके तहत अनुप मजी उर्फ लाला के नेतृत्व वाले कोयला तस्करी गिरोह की जांच चल रही है।
जांच में सामने आया कि ईसीएल लीजहोल्ड क्षेत्रों से कोयला चोरी कर उसे बांकुरा, बर्धमान, पुरुलिया समेत कई जिलों के कारखानों और संयंत्रों में खपाया गया।
इस कोयले का बड़ा हिस्सा शाकंभरी समूह की कंपनियों को बेचे जाने के भी सबूत मिले हैं।
👉 कुल मिलाकर, सवाल अब सिर्फ ED रेड का नहीं, बल्कि यह है कि
क्या एक मुख्यमंत्री को जांच एजेंसी की कार्रवाई में इस तरह दखल देने का अधिकार है?
अब इस पर अंतिम जवाब हाईकोर्ट देगा।










