लखनऊ। प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी मतदाता सूची ने बड़ा आंकड़ा सामने रखा है, जिसमें शहरी जिलों में भारी पैमाने पर नाम हटाए गए, जबकि छोटे और ग्रामीण जिलों में यह संख्या काफी कम रही। उपलब्ध जिला स्तर के संकलित आंकड़ों के अनुसार राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा लगभग 8.2 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसके बाद वाराणसी में करीब 5.7 लाख, कानपुर नगर में लगभग 6.4 लाख, प्रयागराज में करीब 6.1 लाख और गाजियाबाद में करीब 5.9 लाख नाम कटे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में भी लगभग 5.2 लाख और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में करीब 4.8 लाख मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन जिलों में डुप्लीकेट नाम, लगातार माइग्रेशन और शहरी विस्तार के कारण बड़ी संख्या में विलोपन की कार्रवाई करनी पड़ी। इसके उलट सबसे कम असर वाले जिलों की बात करें तो श्रावस्ती में लगभग 42 हजार, चित्रकूट में करीब 55 हजार, महोबा में लगभग 60 हजार, हमीरपुर में करीब 65 हजार और ललितपुर में लगभग 70 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन जिलों में आबादी अपेक्षाकृत स्थिर रहने और कम माइग्रेशन के कारण मतदाता सूची में बड़े बदलाव देखने को नहीं मिले।
चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए की गई है, जिसमें मृतक, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों को चिन्हित कर हटाया गया। जिन मतदाताओं के नाम किसी कारणवश सूची से हट गए हैं, उन्हें पुन: आवेदन कर अपना नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का पुनरीक्षण शहरी जिलों पर अधिक केंद्रित रहा, जिससे बड़े शहरों में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है। वहीं ग्रामीण जिलों में यह प्रक्रिया सीमित स्तर पर ही रही, जिससे वहां मतदाता संख्या में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ।










