Advertisement
Home International कोर्ट की रोक के बाद भी मोदी की चुप्पी: सवर्णों के सब्र...

कोर्ट की रोक के बाद भी मोदी की चुप्पी: सवर्णों के सब्र की परीक्षा क्यों?

0
281

नई दिल्ली, 2 फरवरी (विशेष संवाददाता)। हिन्दू एकता के नाम पर वर्षों से सवर्ण समाज भाजपा और संघ परिवार के साथ खड़ा रहा। चुनाव हों या वैचारिक संघर्ष, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक अस्मिता के हर मोर्चे पर सवर्णों ने बिना शर्त समर्थन दिया। यह भरोसा इस विश्वास पर टिका था कि सत्ता में आने के बाद नीतियाँ ऐसी होंगी जो समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलेंगी, न कि किसी एक वर्ग को राजनीतिक प्रयोगशाला बना दें। लेकिन यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों ने इसी भरोसे को सबसे गहरी चोट पहुँचाई है।

यूजीसी के ताज़ा नियमों को यदि केवल प्रशासनिक सुधार मान लिया जाए, तो यह सच्चाई से आँख मूँदने जैसा होगा। उच्च शिक्षा से जुड़े ये नियम सीधे-सीधे उस वर्ग को प्रभावित करते हैं जो परंपरागत रूप से शिक्षा, शोध और अकादमिक संस्थानों की रीढ़ रहा है। शिक्षक नियुक्ति, प्रोन्नति और योग्यता से जुड़े बदलावों ने सवर्ण समाज के भीतर यह भावना पैदा कर दी है कि उनके साथ छल हुआ है। यही कारण है कि यह मुद्दा अब केवल शिक्षा नीति का नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वासघात का रूप ले चुका है। जब सरकार “हिन्दू एकता” की बात करती है, तब उसे यह भी समझना चाहिए कि एकता केवल नारों से नहीं टिकती, बल्कि न्याय और संतुलन से बनती है। यदि किसी एक वर्ग को यह महसूस होने लगे कि उसकी अनदेखी की जा रही है, तो एकता खोखली हो जाती है। सवर्ण समाज आज यही महसूस कर रहा है। वर्षों तक राजनीतिक संरक्षण देने के बावजूद जब नीतियाँ उनके विरुद्ध जाती दिखें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

Advertisment

कोर्ट द्वारा यूजीसी नियमों पर रोक लगना इस बात का प्रमाण है कि इन नियमों में गंभीर संवैधानिक और व्यावहारिक खामियाँ थीं। अदालत ने हस्तक्षेप कर यह संकेत दे दिया है कि मामला केवल विरोध का नहीं, बल्कि अधिकारों और प्रक्रियाओं का है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मौन और भी अधिक खटकता है। देश का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति यदि इस संवेदनशील विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, तो असमंजस और अविश्वास दोनों बढ़ते हैं।

यह भ्रम पालना कि सवर्ण समाज को चुपचाप नज़रअंदाज़ किया जा सकता है, भाजपा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। सवर्ण समाज कोई बिखरा हुआ समूह नहीं है; यह शिक्षित, संगठित और वैचारिक रूप से सजग वर्ग है। यदि यह वर्ग यह मान ले कि उसके साथ धोखा हुआ है, तो उसका राजनीतिक परिणाम दूरगामी होगा। भाजपा का जनाधार केवल संख्याबल से नहीं, बल्कि विश्वास से बना है। और विश्वास एक बार टूट जाए, तो उसे जोड़ना बेहद कठिन होता है।

संघ परिवार की भूमिका भी यहाँ सवालों के घेरे में है। जो संगठन स्वयं को समाज का नैतिक मार्गदर्शक मानता है, उसकी चुप्पी कई शंकाओं को जन्म देती है। क्या संघ को यह सब दिखाई नहीं दे रहा? या फिर वह भी इस भ्रम में है कि सवर्ण समाज हर परिस्थिति में साथ देता रहेगा? इतिहास गवाह है कि कोई भी वर्ग हमेशा उपेक्षा सहन नहीं करता। जब धैर्य टूटता है, तो उसका विस्फोट राजनीतिक दिशा बदल देता है।

प्रधानमंत्री मोदी को यह समझना होगा कि अब चुप रहने का समय नहीं है। कोर्ट की रोक के बाद उनके पास अवसर है कि वे स्पष्ट रूप से देश को बताएं कि सरकार की मंशा क्या है। यदि यूजीसी नियमों में सुधार की आवश्यकता है, तो उसे खुले मन से स्वीकार किया जाए। यदि किसी वर्ग की आशंकाएँ जायज़ हैं, तो उन्हें संवाद के माध्यम से दूर किया जाए। नेतृत्व का अर्थ यही होता है—कठिन सवालों से भागना नहीं, बल्कि उनका सामना करना। भाजपा को यह भी याद रखना चाहिए कि “सबका साथ, सबका विकास” केवल नारा नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता है। यदि किसी नीति से यह भावना टूटती है, तो उस नीति की पुनर्समीक्षा अनिवार्य है। सवर्ण समाज को यह भरोसा दिलाना होगा कि सरकार उन्हें बोझ नहीं, बल्कि साझेदार मानती है। अन्यथा यह धारणा मजबूत होती जाएगी कि सत्ता ने उनका उपयोग तो किया, लेकिन समय आने पर उन्हें किनारे कर दिया।

अंततः यह मुद्दा यूजीसी नियमों से कहीं बड़ा है। यह भरोसे, संवाद और राजनीतिक ईमानदारी का प्रश्न है। यदि मोदी जी, भाजपा और संघ अब भी यह मानते हैं कि सवर्ण समाज को धोखा देकर भी राजनीतिक स्थिरता बनी रहेगी, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल होगी। अभी भी समय है—बोलने का, सुधार करने का और विश्वास लौटाने का। यदि यह अवसर भी खो दिया गया, तो इतिहास इसे एक चेतावनी नहीं, बल्कि आत्मघाती चूक के रूप में याद रखेगा।

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here