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मुनीर की उलटी गिनती! आसमान से बरसेगी मौत

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नई दिल्ली(एजेंसियां)। भारत की उभरती ड्रोन शक्ति ने पाकिस्तान की सैन्य रणनीति की नींव हिला दी है। नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान द्वारा रातों-रात 35 से अधिक एंटी-ड्रोन यूनिट्स की तैनाती इस बात का खुला संकेत है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी को आने वाले खतरे का पूरा अंदेशा हो चुका है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की संभावनाओं ने पाकिस्तानी सेना और उसके शीर्ष नेतृत्व की बेचैनी कई गुना बढ़ा दी है।

भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध की सीमाओं से बाहर निकलकर ड्रोन आधारित निर्णायक युद्ध की ओर बढ़ चुकी है। भारत दुनिया की सबसे घातक और अत्याधुनिक ड्रोन फोर्स खड़ी कर रहा है, जो जल, थल और नभ—तीनों मोर्चों पर एक साथ हमला करने में सक्षम होगी। रक्षा सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदलेगी और दुश्मन को ज़मीन पर दिखने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि भारतीय ड्रोन खुद लक्ष्य खोजेंगे और खत्म करेंगे।

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने पहली बार भारतीय ड्रोन ताकत का स्वाद चखा था। उस समय आसमान से बरसती सटीक तबाही ने पाकिस्तानी फौज और जनरल मुनीर दोनों को झकझोर कर रख दिया था। सैन्य विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ हमला महज़ एक ट्रेलर था, असली और कहीं ज्यादा खतरनाक तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है।

भारतीय सेना की नई रणनीति के तहत अब हर सैन्य कोर में अलग से ड्रोन फोर्स तैनात की जाएगी, जिसमें करीब 10,000 मल्टी-रोल ड्रोन प्रति कोर शामिल होंगे। ये ड्रोन न केवल निगरानी करेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर AI आधारित किलर स्ट्राइक भी अंजाम देंगे। सेना के भीतर इसे “ढूंढो और मारो” सिद्धांत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है।

भारत की इस आक्रामक तैयारी से घबराकर पाकिस्तान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के अग्रिम इलाकों में ड्रोन-रोधी प्रणालियों की भारी तैनाती शुरू कर दी है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट, कोटली और भीमबर सेक्टरों के सामने मानवरहित हवाई प्रणालियों (C-UAS) को सक्रिय किया गया है। रावलकोट सेक्टर में दूसरी आज़ाद कश्मीर ब्रिगेड, कोटली में तीसरी और भीमबर सेक्टर में सातवीं आज़ाद कश्मीर ब्रिगेड को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पाकिस्तान ने डर के चलते जिन प्रणालियों को तैनात किया है, उनमें स्पाइडर काउंटर-यूएएस सिस्टम प्रमुख है, जो निष्क्रिय रेडियो फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन तकनीक के ज़रिए 10 किलोमीटर तक ड्रोन पहचानने का दावा करता है। इसके साथ ही सफराह एंटी-यूएवी जैमिंग गन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ड्रोन के कंट्रोल, वीडियो और GPS लिंक को बाधित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।

सिर्फ सॉफ्ट-किल सिस्टम ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान ने घबराहट में पारंपरिक वायु रक्षा हथियार भी मैदान में उतार दिए हैं। इनमें ओर्लिकॉन GDF 35 मिमी दोहरी बैरल विमानरोधी तोपें और अंज़ा Mk-II व Mk-III MANPADS शामिल हैं, जिन्हें कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन युद्ध में बचाव नहीं, बल्कि वर्चस्व ही निर्णायक होता है, और यह वर्चस्व अब पूरी तरह भारत के पक्ष में झुक चुका है।

सैन्य विश्लेषकों के बीच अब यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि जब भारतीय ड्रोन क्षमता लॉन्च पैड, कमांड सेंटर, सप्लाई लाइन और शीर्ष सैन्य नेतृत्व तक सटीक वार करने में सक्षम हो चुकी है, तो क्या पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर के लिए सबसे बड़ा खतरा अब ज़मीन से नहीं बल्कि आसमान से आने वाला है?

भारत ने अपने संकेत साफ कर दिए हैं—
अब न चेतावनी दी जाएगी, न सहन किया जाएगा।
अगला वार निर्णायक होगा, और वह आसमान से आएगा।

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