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नैना देवी पीठ 52 शक्तिपीठों में सम्मिलित नहीं, पर सिद्ध पीठ के रूप में मान्यता

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उत्तर भारत की नौ देवियां

हिमाचल प्रदेश में यह प्रसिद्ध मंदिर एक पहाड़ी स्थल पर स्थित है जो भाखड़ा नांगल बांध के पास है। ऐसा माना जाता है कि सती के नेत्र का निपात यहां हुआ था, अतः मंदिर नैना देवी कहलाया। यद्यपि इस पीठ को सबने 52 पीठों में सम्मिलित नहीं किया पर सिद्ध पीठ के रूप में इसे संपूर्ण भारत में पूर्ण मान्यता प्राप्त है। एक दन्त कथा के अनुसार, नैना नाम का एक गूजर चरवाहा इस पहाड़ी पर अपने पशु चराने आता था।

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उसने एक बार देखा कि एक अनव्यायी गाय जब पीपल के नीचे जाती है, तो उसके स्तनों से अपने आप दूध निकल पड़ता है। यह दृश्य वह प्रतिदिन देखता था। अंत में एक दिन उसने उस स्थान में पत्ते हटाए, जहां पर गाय का दूध गिरता था। पत्ते हटाने पर उसे वहां पिंडी के रूप में मां भगवती की प्रतिमा दिखलाई दी। उसी रात उसे मां ने सपने में दर्शन दिए और कहा कि मैं आदि शक्ति दुर्गा हूं और मेरा मंदिर पीपल के पेड़ के नीचे बनवा दे तो मैं तेरे नाम से प्रसिद्ध हो जाऊंगी। नैना गूजर ने तुरंत प्रात : उठकर मंदिर की नींव रख दी। शीघ्र ही इस स्थान की महिमा चारों ओर फैल गई और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगी तो भक्तों ने मां का एक भव्य मंदिर बनवा दिया, जिसे नैना देवी नाम से जाना जाने लगा। इसके पास एक गुफा भी है, जिसे नैना देवी गुफा कहते हैं और भक्त वहां भी दर्शनार्थ जाते हैं।

नैना देवी मंदिर का उल्लेख 

मंदिर का प्रांगण पहाड़ी पर स्थित है। इसके चारों ओर 10 फीट ऊंची चहारदीवारी बनी हुई है। उसके मध्य में मुख्य मंदिर स्थित है। बाहर एक बड़ा भव्य मुख्य द्वार है, जहां से भक्तगण अंदर जाते हैं और इसके पास ही एक छोटा द्वार है, जहां से वे बाहर जाते हैं।

नैना देवी मंदिर के अन्य दर्शनीय स्थल

  1. हवन कुंड : नवरात्रि में यहां नौ दिन तक निरंतर पूजा – अर्चना होती है और इसके पश्चात् हवन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके करने से मनुष्यों की सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी और वह धन, धान्य से परिपूर्ण हो जाएगा।
  2. ब्रह्मकपाली कुंड : मंदिर के समीप एक सुंदर सरोवर है, जिसे ब्रह्मकपाली कुंड कहा जाता है। इसमें स्नान करने से अनेक व्याधियां दूर हो जाती हैं।
  3. प्राचीन गुफा : कुंड से कुछ दूर एक प्राकृतिक गुफा है। ऐसा माना जाता है कि यहां स्वामी कृष्णानंद जी ने अपना निवास बनाया था। तब से इसका महत्त्व बढ़ गया है और यात्री इस गुफा को भी एक तीर्थ मान कर दर्शन करते हैं।

यात्रा मार्ग: पंजाब राज्य में भाखड़ा नांगल लाइन पर आनंद साहिब का प्रसिद्ध रेलवे स्टेशन है, जहां से मंदिर लगभग 20 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी पर दो किलोमीटर पैदल चढ़ना पड़ता है। वर्तमान में एक उड़न खटोला द्वारा वहां सरलता से पहुंचा जा सकता है। पंजाब के आसपास के प्रमुख नगरों से यह स्थान सड़क मार्ग से भी जुड़ा है। ठहरने हेतु यात्रियों को आनंदपुर साहब गुरुद्वारे में या बाहर स्थिति होटलों आदि में रुकना पड़ता है। नैना देवी में ठहरने की उचित व्यवस्था नहीं है।

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