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पोलियो से टूटा नहीं, चैंपियन बना

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यह कहानी किसी एक खेल की कहानी नहीं है, बल्कि जीवन की उस सच्चाई की तस्वीर है, जहाँ संघर्ष ही सबसे बड़ा शिक्षक होता है और हौसला सबसे बड़ी पूंजी।
तुषार नागर आज केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उम्मीद, धैर्य, आत्मविश्वास और संघर्ष की एक ऐसी प्रेरक प्रतिमा हैं, जो यह सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी भी कठोर क्यों न हों—अगर मन में संकल्प हो, तो जीवन फिर से नई उड़ान भर सकता है।

लखनऊ के तुषार नागर की संघर्ष से सफलता तक प्रेरक कहानी………

जिंदगी कभी-कभी इंसान को ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है, जहां बचपन की हंसी, खेल और सपनों की उड़ान एक झटके में थम जाती है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटते नहीं, बल्कि हालातों को अपनी ताकत बना लेते हैं। लखनऊ के तुषार नागर ऐसी ही संघर्ष, साहस और संकल्प की मिसाल हैं।

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महज तीन वर्ष की उम्र में पोलियो ने तुषार के जीवन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। जिस उम्र में बच्चे दौड़ते-भागते हैं, उसी उम्र में उनका शरीर कमजोर पड़ गया। घर में सन्नाटा था, माता-पिता की आंखों में चिंता थी और भविष्य को लेकर डर। लेकिन तुषार की आंखों में तब भी उम्मीद की चमक बाकी थी। तुषार का बचपन सामान्य नहीं रहा। चलना, दौडऩा और खेलना उनके लिए कठिन था। कई बार दर्द ने उन्हें तोड़ा, कई बार परिस्थितियों ने रोका और कई बार समाज की नजरों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। लेकिन हर बार उनके भीतर से एक ही आवाज उठी—हार नहीं माननी है। यही जिद उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत बनी। उन्होंने अपने शरीर की सीमाओं को स्वीकार किया, लेकिन सपनों की सीमाओं को कभी नहीं माना। कठिन अभ्यास और मजबूत मानसिकता ने उनके भीतर नई ऊर्जा भर दी।

समय के साथ तुषार का परिचय पैरा टेबल टेनिस से हुआ। यह खेल उनके लिए केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि जिंदगी को फिर से नई दिशा देने का माध्यम बन गया। शुरुआती दिनों में रैकेट पकडऩा, संतुलन बनाना और लगातार अभ्यास करना आसान नहीं था। हार और निराशा कई बार सामने आई, लेकिन उन्होंने हर असफलता को सीख में बदला। तुषार की कहानी सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रही। उन्होंने शिक्षा में भी वही मेहनत और संघर्ष दिखाया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनकर यह साबित कर दिया कि सफलता सिर्फ मैदान में नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में हासिल की जा सकती है। इन्हीं प्रयासों के बल पर तुषार नागर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

 

आज वह विश्व पैरा टेबल टेनिस रैंकिंग में 49वें स्थान पर हैं। यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उस इंसान की विजयगाथा है जिसने असंभव को संभव कर दिखाया। तुषार नागर आज सिर्फ खिलाड़ी या प्रोफेशनल नहीं, बल्कि उम्मीद और हौसले की प्रेरक मिसाल हैं। उनकी जिंदगी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों—अगर मन में संकल्प हो, तो इंसान अपने दर्द को भी अपनी ताकत बना सकता है और नई उड़ान भर सकता है।

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