बरगद (वटवृक्ष) की महिमा और पूजा का उल्लेख अनेक प्राचीन हिन्दू ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। नीचे मैं उन प्रमुख धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों का उल्लेख कर रहा हूँ जिनमें वटवृक्ष की विशेषता और पूजन विधि का वर्णन किया गया है:
📚 वटवृक्ष का उल्लेख जिन प्रमुख ग्रंथों में हुआ है
1. स्कंद पुराण (Skanda Purana)
- स्कंद पुराण में वटवृक्ष को पुण्यदायक और तीर्थ समान बताया गया है।
- इसमें कहा गया है कि वटवृक्ष के नीचे तप करने या ध्यान करने से सद्गति प्राप्त होती है।
- वटवृक्ष के दर्शन, पूजन और परिक्रमा से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
2. पद्म पुराण (Padma Purana)
- पद्म पुराण में वट सावित्री व्रत का विस्तार से वर्णन है।
- सावित्री-सत्यवान की कथा इसी ग्रंथ में मिलती है।
- इसमें बताया गया है कि सावित्री ने वटवृक्ष के नीचे यमराज से अपने पति सत्यवान को वापस पाया।
3. विष्णु पुराण (Vishnu Purana)
- इसमें वटवृक्ष को भगवान विष्णु के एक रूप के रूप में दर्शाया गया है।
- वटवृक्ष के तने में विष्णु का वास बताया गया है।
4. महाभारत
- वन पर्व में युधिष्ठिर और अन्य पांडवों का वटवृक्ष के नीचे तपस्या करने का उल्लेख है।
- इसमें वटवृक्ष को आश्रमों और तपोवनों का हिस्सा बताया गया है।
5. गरुड़ पुराण
- इसमें वर्णन है कि वटवृक्ष की पूजा करने से पितृ दोष समाप्त होता है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
6. मनुस्मृति
- इसमें वटवृक्ष को ब्राह्मणों और तपस्वियों का आराध्य कहा गया है।
- वटवृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान, वेद पाठ, और यज्ञ करना शुभ माना गया है।
🌿 अन्य ग्रंथ व उल्लेखनीय बातें:
- अथर्ववेद में वृक्षों की महिमा है, और वटवृक्ष को “अमृत वृक्ष” कहा गया है।
- ब्रह्मवैवर्त पुराण में वटवृक्ष की धार्मिक शक्ति और पारलौकिक प्रभाव का उल्लेख मिलता है।
🙏 बरगद (वटवृक्ष) पूजन मंत्र
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परिक्रमा के समय (सप्त या अष्ट परिक्रमा)
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अर्थ: “मैं श्रद्धा से वट वृक्ष को, सावित्री पतिव्रता की तरह, पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिए नमस्कार करती हूँ।”
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संकल्प मंत्र (नीचे वट पूर्णिमा व्रत हेतु)
अर्थ: “पति के सौभाग्य और दीर्घ जीवन की कामना से मैं आज वट पूर्णिमा व्रत का संकल्प करती हूँ।”
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उच्च स्तरीय पूजा मंत्र (~108 बार)
यूट्यूब वट सावित्री विशेष मंत्र में 108 बार जाप की विधि बताई जाती है, जो विशेष फलदायी मानी जाती है।
🪷 पूजन विधि सारांश
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सुबह स्नान के बाद, संकल्प लेकर जीवनदायिनी वटवृक्ष के नीचे बैठें।
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कच्चा सूत (या मौली) लेकर 7, 21, या 108 बार वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा।
- हर परिक्रमा के साथ ऊपर दिए मंत्रों का जाप करें।
- तने में हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल, सिंदूर चढ़ाएं।
- पानी अर्पित करें, प्रति परिक्रमा सूत लपेटें और दीप, धुप, नारियल, भिगा चना आदि अर्पण करें।
- अंत में सावित्री–सत्यवान की कथा सुनें या सुनाएँ।
📌 निष्कर्ष
वटवृक्ष केवल एक वृक्ष नहीं है, बल्कि त्रिदेवों का निवास, सौभाग्य का प्रतीक और धार्मिक शक्ति का केंद्र माना गया है।
यदि आप चाहें, तो मैं स्कंद या पद्म पुराण से सावित्री-सत्यवान कथा का शुद्ध हिंदी रूपांतरण भी उपलब्ध करा सकता हूँ।
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