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दिलचस्प इतिहास से जुड़ी है पोस्टकार्ड संग्रह की आकर्षक दुनिया

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जालौन 22 जनवरी (एजेंसी)। ईमेल और व्हाट्सएप के इस युग में आज की युवा पीढ़ी को पोस्टकार्ड और अंतरदेशीय पत्र के बारे में पता भी नहीं होगा मगर एक जमाने में यही संचार तंत्र दूर दराज बैठे परिजनो,मित्रों और रिश्तेदारों तक सूचना पहुंचाने में अहम भूमिका अदा करते थे।

डिजिटल युग में, पोस्टकार्ड का उपयोग भले ही कम हो गया हो, लेकिन इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को नकारा नहीं जा सकता और यही कारण है कि पोस्टकार्ड संग्रह के प्रति शौक में आज भी कोई कमी नजर नहीं आती है। इतिहासकार डॉक्टर हरिमोहन पुरवार ने बताया कि डेल्टियोलॉजी, यानी पोस्टकार्ड संग्रह, एक दिलचस्प और इतिहास से जुड़ी हुई विधा है। पोस्टकार्ड संग्रह न केवल एक शौक है, बल्कि यह अतीत की यादों और संचार के बदलते तरीकों को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

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आस्ट्रिया को पोस्टकार्ड का जनक माना जाता है। वर्ष 1869 में, दुनिया का पहला पोस्टकार्ड आस्ट्रिया में जारी किया गया। उस समय यह संचार का एक सरल और प्रभावी तरीका था, जिसे आम जनता ने तेजी से अपनाया। आस्ट्रिया के इस नवाचार ने अन्य देशों को भी प्रेरित किया। देखादेखी इंग्लैंड ने 1872 में अपने यहां पोस्टकार्ड का प्रचलन शुरू किया।

भारत में पोस्टकार्ड का इतिहास 1879 से शुरू होता है। इसे ‘ईस्ट इंडिया पोस्टकार्ड’ के नाम से जाना गया। उस समय इसका मूल्य मात्र तीन पैसा था। इस पोस्टकार्ड की विशेषता यह थी कि उस पर क्वीन विक्टोरिया के चित्र के साथ डाक टिकट अंकित था। यह पोस्टकार्ड भारतीय डाक सेवाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया और संचार का एक सस्ता और लोकप्रिय साधन साबित हुआ।

डेल्टियोलॉजी के शौकीन लोग पुराने पोस्टकार्डों का संग्रह करते हैं, जो इतिहास, संस्कृति और कला का प्रतिबिंब होते हैं। भारत में भी ऐसे कई संग्रहकर्ता हैं, जिनके पास भारत के पहले पोस्टकार्ड से लेकर विभिन्न कालखंडों के दुर्लभ पोस्टकार्ड मौजूद हैं। ये पोस्टकार्ड न केवल डाक सेवाओं के इतिहास को दिखाते हैं, बल्कि उस समय की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक भी प्रदान करते हैं।

डेल्टियोलॉजी का महत्व केवल संग्रहण तक सीमित नहीं है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि कैसे पोस्टकार्ड संचार का साधन बनने के साथ-साथ कला और अभिव्यक्ति का माध्यम भी बना। पुराने पोस्टकार्डों पर चित्र, संदेश और डाक टिकटें उस युग की कहानी कहती हैं।

पोस्टकार्ड संग्रह, का नाम लैटिन भाषा के दो शब्दों “डेल्टा” और “लोगस” से लिया गया है। “डेल्टा” का अर्थ है कागज का टुकड़ा और “लोगस” का अर्थ है शास्त्र। इस प्रकार, डेल्टियोलॉजी का शाब्दिक अर्थ है “पोस्टकार्ड शास्त्र”। यह कला और संचार के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

डेल्टियोलॉजी केवल पोस्टकार्ड संग्रह तक सीमित नहीं है; यह इतिहास, संस्कृति और रचनात्मकता का संरक्षण भी है। विभिन्न प्रकार के पोस्टकार्ड संग्रहित करना न केवल एक शौक है, बल्कि यह अतीत को जीवंत रखने का एक प्रयास भी है। आज की पोस्ट में प्रस्तुत ये तीन प्रकार के पोस्टकार्ड न केवल अद्वितीय हैं, बल्कि ये डेल्टियोलॉजी की समृद्धता को भी दर्शाते हैं।

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