नितिन नबीन की ताजपोशी से साफ हुआ सत्ता, संगठन और संघ का अगला एजेंडा
नई दिल्ली, 20 जनवरी,(एजेंसियां)। भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनकर यह साफ कर दिया है कि यह महज़ नेतृत्व परिवर्तन नहीं है, बल्कि राजनीतिक दिशा बदलने का ऐलान है। यह फैसला उन तमाम अटकलों, कयासों और अंदरूनी समीकरणों पर विराम लगाता है जिनमें कहा जा रहा था कि भाजपा आने वाले वर्षों में वैचारिक रूप से नरम पड़ सकती है। नितिन नबीन का अध्यक्ष बनना इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त करता है। यह संदेश स्पष्ट है—भाजपा अब समझौते नहीं, आक्रामक संगठनात्मक अनुशासन और स्पष्ट हिन्दुत्व लाइन पर चलेगी।
नितिन नबीन का चयन किसी आकस्मिक घटनाक्रम का परिणाम नहीं है। 45 वर्ष की उम्र में पार्टी की कमान सौंपना इस बात का संकेत है कि भाजपा अब केवल जीतने वाली पार्टी नहीं, बल्कि पीढ़ीगत सत्ता हस्तांतरण को नियंत्रित तरीके से अंजाम देने वाली मशीन बन चुकी है। जेपी नड्डा के अपेक्षाकृत संतुलित और प्रशासनिक नेतृत्व के बाद अब संगठन को ऐसा चेहरा सौंपा गया है जो जमीन से निकला है, संघ की शाखाओं में तपकर तैयार हुआ है और जिसने चुनावी राजनीति में बार-बार अपनी उपयोगिता सिद्ध की है।
यहाँ संघ की भूमिका को नजरअंदाज करना राजनीतिक अज्ञानता होगी। नितिन नबीन संघ के उस कोर विचार से आते हैं, जहाँ संगठन सरकार से ऊपर होता है और विचार सत्ता से पहले। पिछले कुछ वर्षों में भाजपा पर यह आरोप लगता रहा कि पार्टी सरकार-प्रधान हो गई है, संगठन की धार कमजोर हुई है। नबीन की ताजपोशी के साथ संघ ने साफ कर दिया है कि अब संगठन केंद्र में रहेगा, सरकार उसके बाद। यह संदेश केवल भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि उन नेताओं के लिए भी है जो सत्ता में रहते हुए संगठन को हल्के में लेते रहे हैं।
मोदी–शाह की सहमति इस पूरे घटनाक्रम की रीढ़ है। यह नियुक्ति न तो किसी एक व्यक्ति की महत्वाकांक्षा का परिणाम है और न ही किसी गुटीय संतुलन का। यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिसे ‘कंट्रोल्ड ट्रांजिशन’ कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह यह भली-भांति जानते हैं कि 2029 के बाद भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो बिना हिचक वैचारिक लाइन को आगे बढ़ा सके। नितिन नबीन उस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं—न विद्रोही, न ढीले, न ही मीडिया-निर्भर। पूरी तरह संगठन-आधारित नेता।
इस नियुक्ति में योगी फैक्टर भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। नितिन नबीन की राजनीतिक शैली और वैचारिक स्पष्टता उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ द्वारा स्थापित मॉडल से मेल खाती है। यह वही मॉडल है जिसमें कानून, प्रशासन और विचारधारा में कोई भ्रम नहीं होता। भाजपा का यह फैसला बताता है कि पार्टी अब ‘सॉफ्ट हिन्दुत्व’ जैसे शब्दों से आगे निकल चुकी है। अब संदेश सीधा है—हिन्दुत्व पर कोई अस्पष्टता नहीं, कोई माफी नहीं, कोई बैकफुट नहीं।
विपक्ष के लिए यह फैसला किसी झटके से कम नहीं है। कांग्रेस अब भी नेतृत्व संकट और वैचारिक भ्रम से जूझ रही है, वहीं भाजपा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वह सत्ता से पहले संगठन और भावनात्मक मुद्दों पर नियंत्रण रखती है। क्षेत्रीय दलों के लिए यह चेतावनी है कि भाजपा अब केवल चुनावी गठजोड़ से नहीं, बल्कि लंबे वैचारिक युद्ध की तैयारी में है।
नितिन नबीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना एक राजनीतिक घोषणा है। यह घोषणा कि भाजपा थकने वाली नहीं है, झुकने वाली नहीं है और अपने मूल विचार से समझौता करने वाली नहीं है। यह सत्ता की नहीं, सिस्टम की लड़ाई का संकेत है। आने वाले वर्षों में भाजपा का चेहरा और तेवर दोनों बदले हुए दिखेंगे—और उसकी शुरुआत नितिन नबीन से हो चुकी है।










