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Home Religious Dharm-Sanskriti “बरगद का धार्मिक वैभव: त्रिदेव निवास व दीर्घायु का अक्षय प्रतीक”

“बरगद का धार्मिक वैभव: त्रिदेव निवास व दीर्घायु का अक्षय प्रतीक”

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बरगद (वटवृक्ष) को हिन्दू धर्म में अत्यंत पूजनीय, चमत्कारी और दीर्घायु वृक्ष माना गया है। इसकी धार्मिक, आध्यात्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से बहुत बड़ी महिमा है। नीचे इसके सभी पहलुओं को विस्तार से बताया गया है:


🌳 बरगद वृक्ष की महिमा (महत्व)

  1. दीर्घायु और अमरता का प्रतीक:
    बरगद हजारों वर्षों तक जीवित रहता है। इसे अक्षयवट भी कहा जाता है, जो अक्षय (नाश न होने वाला) का प्रतीक है।
  2. त्रिदेवों का वास:
    • जड़ में: ब्रह्मा जी
    • तने में: विष्णु जी
    • पत्तों में: भगवान शिव
      अतः इसे त्रिदेववासी वृक्ष कहा जाता है।
  3. पितृदोष और कालसर्प दोष शांति:
    बरगद की पूजा करने से पितृ दोष शांत होता है, और वंशवृद्धि की कामना भी पूर्ण होती है।
  4. संतान प्राप्ति और सौभाग्य:
    विशेषकर महिलाएं व्रत करती हैं ताकि उन्हें संतान सुख, सौभाग्य और पति की दीर्घायु मिले।

📿 बरगद वृक्ष की पूजा विधि

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  2. वटवृक्ष के पास जाकर उसका पूजन करें:
    • हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, जल, दूध से अर्घ्य दें।
    • रक्षा सूत्र (कलावा) से बरगद के तने को 7 या 108 बार लपेटकर परिक्रमा करें।
    • दीपक जलाकर पूजा करें।
    • मिठाई, फल, नारियल आदि का भोग अर्पण करें।
  3. कथावाचन या मंत्रोच्चारण करें:
    • “ॐ वृक्षराजाय नमः”
    • “ॐ नमो वटवृक्षाय त्रिदेवाय नमः”

📆 किन पर्वों में होती है बरगद की पूजा

पर्व / व्रत तिथि (हिन्दू कैलेंडर) विशेषता
वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं
वट पूर्णिमा ज्येष्ठ पूर्णिमा विशेषकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में मनाया जाता है
गणगौर पूजन में चैत्र शुक्ल सौभाग्य की कामना के लिए
सावन सोमवार सावन माह शिव पूजन के साथ वटवृक्ष की पूजा भी होती है

🙏 बरगद वृक्ष में जिन देवताओं का वास माना गया है:

  • ब्रह्मा जी (जड़ में)
  • विष्णु जी (तने में)
  • शिव जी (पत्तों में)
  • सावित्री माता (पूजन में कथा अनुसार)
  • नाग देवता (जड़ के पास नागों का वास माना जाता है)
  • पितर देवता (पितृ दोष शांति हेतु वटवृक्ष पूजन)

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