Advertisement
Home International यूजीसी पर सवर्ण असंतोष: पांच राज्यों में भाजपा की डगर हुई कठिन?

यूजीसी पर सवर्ण असंतोष: पांच राज्यों में भाजपा की डगर हुई कठिन?

0
97

नई दिल्ली, 17 फरवरी( विशेष संवाददाता)।  देश के पांच अहम चुनावी राज्य — पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी — में विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। यूजीसी से जुड़े फैसलों को लेकर सवर्ण समाज में यदि नाराजगी गहराती है, तो इसका सीधा असर भारतीय जनता पार्टी के चुनावी गणित पर पड़ सकता है।

यह वर्ग भले कई राज्यों में संख्यात्मक रूप से 5% से 22% के बीच हो, लेकिन राजनीतिक रूप से यह “कंसोलिडेटेड वोट” की तरह काम करता है। जब यह एक दिशा में जाता है, तो 2–4% का स्विंग दर्जनों सीटों का परिणाम बदल देता है। इन पांच राज्यों में सवर्ण मतदाताओं की संख्या भले अलग-अलग हो, लेकिन उनका संगठित रुख चुनावी परिणामों को गहराई से प्रभावित कर सकता है। बंगाल और असम में यह वर्ग सीधे सत्ता संतुलन बदल सकता है। केरल और तमिलनाडु में भाजपा के विस्तार की रणनीति इसी वर्ग पर निर्भर है। पुडुचेरी में कम सीटों के कारण थोड़ी सी नाराजगी भी बड़ा असर डाल सकती है।

Advertisment

राजनीतिक दृष्टि से देखें तो 3%–5% का स्विंग अक्सर 20–30 सीटों का अंतर पैदा कर देता है। ऐसे में यदि यूजीसी का मुद्दा सवर्ण असंतोष का प्रतीक बनता है, तो भाजपा के लिए यह चुनाव आसान नहीं होंगे। चुनावी बिसात बिछ चुकी है। अब नजर इस पर है कि क्या भाजपा समय रहते नाराजगी दूर कर पाएगी, या फिर 5% से 22% के बीच का यह वोट शेयर सत्ता समीकरण बदल देगा।

बंगाल: 15%–20% सवर्ण, करीबी मुकाबलों का निर्णायक वर्ग

पश्चिम बंगाल में सवर्ण मतदाता लगभग 15% से 20% के बीच माने जाते हैं। ब्राह्मण, कायस्थ और वैश्य समुदाय लंबे समय से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली रहे हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिस सामाजिक समीकरण के सहारे 77 सीटें हासिल कीं, उसमें सवर्ण वोटों का महत्वपूर्ण योगदान माना गया। बंगाल की लगभग 60–70 सीटें ऐसी हैं, जहां जीत-हार का अंतर 3% से कम रहा। ऐसे में यदि सवर्ण मतदाता 3–5% की भी दूरी बनाते हैं, तो भाजपा की संभावित बढ़त कई सीटों पर उलट सकती है। यहां तृणमूल कांग्रेस पहले से मजबूत है। यदि भाजपा का कोर सवर्ण समर्थन कमजोर हुआ, तो मुकाबला और कठिन हो सकता है।

असम: 18%–22% का स्थायी आधार, पर खतरे की आहट

असम में सवर्ण मतदाता 18% से 22% के बीच आंके जाते हैं। असमिया ब्राह्मण, कायस्थ और कुछ वैश्य समुदाय भाजपा के पारंपरिक समर्थक रहे हैं।

असम में भाजपा की सरकार का आधार हिंदू वोटों का व्यापक ध्रुवीकरण रहा है, जिसमें सवर्ण वर्ग स्थिर समर्थन देता रहा। यदि यह वर्ग यूजीसी जैसे मुद्दों पर नाराज होकर मतदान में उदासीन हो जाए या विकल्प तलाशे, तो भाजपा के लिए सत्ता बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करीबी सीटों पर 2–3% वोट स्विंग 10–15 सीटों तक का अंतर पैदा कर सकता है।

तमिलनाडु: 5%–8%, पर प्रभाव शहरी सीटों पर केंद्रित

तमिलनाडु में सवर्ण मतदाता 5% से 8% के बीच माने जाते हैं। यहां ब्राह्मण समुदाय की संख्या सीमित है, लेकिन चेन्नई, कोयंबटूर और कुछ शहरी क्षेत्रों में इनका प्रभाव अधिक है।

भाजपा पहले ही यहां सीमित राजनीतिक आधार पर चुनाव लड़ती है। यदि सवर्ण वर्ग में असंतोष बढ़ता है, तो पार्टी की संभावित बढ़त और गठबंधन की रणनीति प्रभावित हो सकती है। हालांकि यहां सत्ता की सीधी लड़ाई द्रविड़ दलों के बीच रहती है, लेकिन भाजपा के विस्तार की संभावनाएं इसी वर्ग पर काफी हद तक टिकी हैं।

केरल: 10%–15% का रणनीतिक वोट बैंक

केरल में सवर्ण मतदाता 10% से 15% के बीच माने जाते हैं। नंबूदरी ब्राह्मण और नायर समुदाय का एक हिस्सा सामान्य वर्ग में आता है।

केरल में भाजपा अभी तक बड़ी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर सकी है, लेकिन वह लगातार विस्तार की कोशिश में है। यहां 10–12 सीटें ऐसी मानी जाती हैं, जहां 3–4% वोट का अंतर परिणाम बदल सकता है। यदि सवर्ण मतदाता असंतुष्ट होकर भाजपा से दूरी बनाते हैं, तो पार्टी की “ब्रेकथ्रू” रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है।

पुडुचेरी: 8%–12% का निर्णायक झुकाव

पुडुचेरी में सवर्ण मतदाता 8% से 12% के बीच माने जाते हैं। यहां कुल सीटें कम हैं, इसलिए 2–3% वोट शिफ्ट भी सरकार के गठन पर सीधा असर डाल सकता है। पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन के सहारे मजबूत स्थिति में रही है। लेकिन यदि सवर्ण मतदाता असंतोष जताते हैं, तो गठबंधन की गणित बिगड़ सकती है।

यूजीसी: न्याय या राजनीति?

“कोर्ट का कवच या नीतिगत पक्षपात? यूजीसी पर पर तीखे सवाल”

हनुमान चालीसा की चौपाइयों को सिद्ध करने की संपूर्ण विधि

सनातन धर्म, जिसका न कोई आदि है और न ही अंत है, ऐसे मे वैदिक ज्ञान के अतुल्य भंडार को जन-जन पहुंचाने के लिए धन बल व जन बल की आवश्यकता होती है, चूंकि हम किसी प्रकार के कॉरपोरेट व सरकार के दबाव या सहयोग से मुक्त हैं, ऐसे में आवश्यक है कि आप सब के छोटे-छोटे सहयोग के जरिये हम इस साहसी व पुनीत कार्य को मूर्त रूप दे सकें। सनातन जन डॉट कॉम में आर्थिक सहयोग करके सनातन धर्म के प्रसार में सहयोग करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here