2026- 2036 का दशक संरचनात्मक सुधार → संस्थागत सुदृढ़ीकरण → तकनीकी-नवाचार → वैश्विक प्रभाव की क्रमिक यात्रा दर्शाता है। 2029–2033 के बीच शनि के कठोर प्रभावों से नीतिगत कड़ाई और जवाबदेही बढ़ने की प्रवृत्ति। 2034–2036 में बृहस्पति-प्रेरित विस्तार से सॉफ्ट पावर, तकनीक और युवा-नेतृत्व उभर सकता है।
आधार: 15 अगस्त 1947, मध्यरात्रि (00:00), नई दिल्ली—इसी समय को व्यापक रूप से “भारत की स्वतंत्रता-कुंडली” के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस कुंडली में वृष लग्न, चंद्रमा कर्क में, और शनि कर्क में माने जाते हैं। नीचे का विश्लेषण केवल गोचर (Transit), दशा-प्रवृत्ति की सामान्य प्रवृत्तियों और प्रमुख ग्रह-चक्रों पर आधारित है; यह आस्था/परंपरा-आधारित व्याख्या है, निश्चित भविष्यकथन तो ईश्वर के अधीन है।
यह दशक तीन चरणों में विभाजित दिखाई देता है:
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संरचनात्मक सुधार (2026–2029)
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संस्थागत सुदृढ़ीकरण (2030–2033)
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तकनीकी और वैश्विक विस्तार (2034–2036)
2026
मुख्य गोचर: शनि मीन में; बृहस्पति मिथुन में; राहु-केतु का परिवर्तन वर्ष के दौरान।
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राजनीति/शासन: शनि का 11वें भाव से गोचर (वृष लग्न मानकर) दीर्घकालिक नीतियों पर जोर बढ़ाता है। सहयोगी दलों/राज्यों के साथ तालमेल की परीक्षा।
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अर्थव्यवस्था: बृहस्पति का मिथुन गोचर व्यापार, संचार, टेक-सेक्टर को गति देता है; लेकिन कर्ज/राजकोषीय अनुशासन पर सख्ती।
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सामाजिक माहौल: राहु-केतु बदलाव से वैचारिक ध्रुवीकरण उभर सकता है, पर संवाद की नई पहल भी।
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समग्र संकेत: “नींव मजबूत करने” का वर्ष—धीमी पर स्थिर प्रगति।
2027
मुख्य गोचर: बृहस्पति कर्क में उच्च; शनि मीन में स्थिर।
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राजनीति/शासन: बृहस्पति का उच्च होना जनकल्याणकारी घोषणाओं, बड़े सामाजिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।
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अर्थव्यवस्था: कृषि, जल-संसाधन, पोषण, स्वास्थ्य-नीतियों में विस्तार।
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विदेश नीति: मानवीय कूटनीति, क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है।
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समग्र संकेत: लोक-समर्थन और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस।
2028
मुख्य गोचर: शनि मीन से मेष की ओर संक्रमण की तैयारी; बृहस्पति सिंह।
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राजनीति/शासन: नेतृत्व-केंद्रित विमर्श; सत्ता-संतुलन के प्रश्न उभरते हैं।
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अर्थव्यवस्था: इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा-उद्योग, स्टार्टअप-इकोसिस्टम को बल।
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सामाजिक माहौल: राष्ट्रीय गौरव/पहचान पर चर्चा तेज।
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समग्र संकेत: “दिशा तय करने” का वर्ष—दीर्घकालिक रोडमैप।
2029
मुख्य गोचर: शनि मेष में प्रवेश (साढ़ेसाती/धैय्या प्रभावों की चर्चा); बृहस्पति कन्या।
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राजनीति/शासन: शनि मेष अनुशासन और कठोर निर्णयों की मांग करता है—संरचनात्मक सुधार संभव।
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अर्थव्यवस्था: श्रम-नीतियाँ, कौशल-विकास, MSME पर जोर; व्यावहारिक सुधार।
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चुनौती: विरोध-प्रदर्शन/सख्ती की धारणा।
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समग्र संकेत: “कठिन पर आवश्यक” निर्णयों का वर्ष।
2030
मुख्य गोचर: शनि मेष; बृहस्पति तुला।
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राजनीति/शासन: संतुलन-राजनीति; न्यायिक/संवैधानिक बहसें प्रमुख।
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अर्थव्यवस्था: साझेदारी मॉडल, PPP परियोजनाएँ, व्यापार-संधियाँ।
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विदेश नीति: बहुपक्षीय मंचों पर सक्रियता।
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समग्र संकेत: संतुलन और समझौते की कला।
2031
मुख्य गोचर: शनि मेष अंत्य; बृहस्पति वृश्चिक।
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राजनीति/शासन: आंतरिक सुरक्षा, खुफिया/साइबर सुरक्षा पर बल।
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अर्थव्यवस्था: ऊर्जा, खनिज, रणनीतिक संसाधन में निवेश।
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सामाजिक माहौल: गोपनीय/संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस।
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समग्र संकेत: “गहराई में सुधार”—सिस्टम-ओवरहॉल।
2032
मुख्य गोचर: शनि वृष में प्रवेश (लग्न पर शनि); बृहस्पति धनु।
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राजनीति/शासन: लग्न पर शनि—राष्ट्र-छवि की परीक्षा; जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग।
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अर्थव्यवस्था: दीर्घकालिक कर-सुधार, वित्तीय अनुशासन।
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विदेश नीति: सिद्धांत-आधारित रुख; वैश्विक मंचों पर वैचारिक स्पष्टता।
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समग्र संकेत: परिपक्वता और आत्म-समीक्षा।
2033
मुख्य गोचर: शनि वृष; बृहस्पति मकर।
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राजनीति/शासन: प्रशासनिक पुनर्गठन; संस्थागत सुदृढ़ीकरण।
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अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढाँचा, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स को मजबूती।
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चुनौती: सख्त नियमों से असंतोष की संभावना।
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समग्र संकेत: “संरचना पहले”—दीर्घकालिक स्थिरता।
2034
मुख्य गोचर: शनि वृष; बृहस्पति कुम्भ।
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राजनीति/शासन: तकनीक-आधारित शासन (AI/डिजिटल) में छलांग।
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अर्थव्यवस्था: हरित-ऊर्जा, नवाचार, स्टार्टअप-नीतियाँ।
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सामाजिक माहौल: युवा-नेतृत्व और नागरिक भागीदारी।
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समग्र संकेत: नवाचार और सामाजिक अनुबंध का नवीनीकरण।
2035
मुख्य गोचर: शनि मिथुन; बृहस्पति मीन।
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राजनीति/शासन: संचार-कौशल, मीडिया-नीति, शिक्षा-सुधार केंद्र में।
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अर्थव्यवस्था: सेवा-क्षेत्र, निर्यात, रचनात्मक उद्योग।
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विदेश नीति: सांस्कृतिक कूटनीति—“सॉफ्ट पावर” का विस्तार।
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समग्र संकेत: विचारों का प्रसार और वैश्विक प्रभाव।
2036
मुख्य गोचर: शनि मिथुन; बृहस्पति मेष।
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राजनीति/शासन: निर्णायक पहल; नई पीढ़ी के नेतृत्व का उभार।
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अर्थव्यवस्था: रक्षा-तकनीक, स्पेस/डीप-टेक में तेजी।
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सामाजिक माहौल: आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक भावना।
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समग्र संकेत: “नई शुरुआत”—पिछले दशक के सुधारों का फल।










