भारतीय केसरिया वाहिनी ने बजाया बिगुल चढ़ावा हमारा तो चढ़ावे पर अधिकार हमारा
लखनऊ। हिन्दू मंदिरों को मिलने वाला चढ़ावा सरकारी नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए और इसका उपयोग हिन्दू धर्म के उत्थान, शिक्षा, स्वस्थ्य व रोजगार के लिए ही होना चाहिए। उक्त उदगार भारतीय केसरिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज कृष्ण श्रीवास्तव ने वाहिनी की अति महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।
वाहिनी के मुख्यालय पर आयोजित बैठक के अध्यक्षीय संबोधन में श्री श्रीवास्तव ने कहा कि हजारों सालों से हिन्दू मंदिरों को मिलने वाला चढ़ावा सरकार ले लेती है और उसे अन्य धर्मों के प्रचार प्रसार व उनके धार्मिक यात्राओं और स्थलों के निर्माण पर व्यय करती है जो संविधान विरोधी है और धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को तत्काल अध्यादेश लाकर इस अन्याय को रोकना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सनातन समाज इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव हृदय कुमार स्वप्निल ने कहा कि सनातन धर्म के मंदिरों को प्राप्त हो रहे भारी धन का उपयोग यदि सनातन समाज के हित में किया जाये तो उसका लाभ समाज के सभी वर्गों को मिलेगा। राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव ने यह भी कहा कि जब सरकार अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर प्राप्त होने वाले चढ़ावे को नहीं लेती तो फिर हिन्दू मंदिरों को प्राप्त चढ़ावा लेना सनातन धर्म के साथ धोखा है । बैठक में भाजपा के अनुसूचित माेर्चा के सदस्य बच्चू लाल भारती ने कहा कि हिन्दू धर्म में कर्म पर आधारित वर्ण व्यवस्था है। केंद्र की सरकार ने यूजीसी नियम लगाकर हिन्दू समाज में दुराव पैदा किया है। सरकार के इस कृत्य के बाद अब सिर्फ योगी से उम्मीद है।
बैठक में अपना विचार रखते हुए राष्ट्रीय महासचिव अंकुर सिंह ने कहा कि सनातन धर्म के लोग अब जागरूक हो गए हैं और मन्दिरों को प्राप्त चढ़ावे का उपयोग सिर्फ और सिर्फ सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को के कल्याण में ही व्यय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक ओर सनातन धर्म के लोग बेरोज़गारी,भुखमरी व अशिक्षा से जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर मंदिरों को प्राप्त होने वाला धन अन्य धर्मों के उपयोग में लाया जाना हर दृष्टि से गलत है और इस पर सरकार को कदम उठाना पड़ेगा।
बैठक में उपस्थित लोगों उक्त वक्ताओं के अलावा अजीत जी,संजीव श्रीवास्तव, प्रकाश, डॉ सत्येन्द्र कुमार,मऊ से आए महेन्द्र राजभर, अजय विश्वकर्मा, नरेन्द्र मल्ल निराला तथा रामप्यारे शर्मा, डॉ अनिल दीक्षित, रचना श्रीवास्तव, अंकुर सिंह, विशाल श्रीवास्तव, नागिन देव, रवि शंकर प्रसाद, अमित अग्रवाल, डॉ. अनिल त्रिपाठी, विजय वर्मा, राजेश जेना, दिनेश तिवारी, बी. आर. सिंह, डॉ. रेखा सिंह, रचना श्रीवास्तव, अजीत कुमार श्रीवास्तव, राजेश्वर प्रसाद, एच. के. सुगंधी, डॉ. सत्येंद्र कुमार सहित कई अन्य लोग भी उपस्थित रहे।










