डर से ग्रामीणों ने खुद ढहाई मस्जिद
संभल, 4 जनवरी (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा, चाहे वह धार्मिक स्वरूप में ही क्यों न हो, अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रविवार को असमोली थाना क्षेत्र सहित कई गांवों में प्रशासन का ‘पीला पंजा’ पूरी ताकत से गरजा। भारी पुलिस बल, पीएसी और तीन बुलडोजरों के साथ पहुंची टीम ने सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे और मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई से पहले ही इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था और ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही थी ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
इस कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला दृश्य हाजीपुर गांव में देखने को मिला, जहां प्रशासन के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने अवैध मस्जिद को खुद ही गिरा दिया। यह मस्जिद करीब 1339 वर्ग मीटर, यानी लगभग डेढ़ बीघा सरकारी जमीन पर बनी हुई थी। जैसे ही ग्रामीणों को प्रशासन की सख्त कार्रवाई की जानकारी मिली, उन्होंने रातभर हथौड़े और छेनी से मस्जिद को तोड़ डाला। सुबह जब तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे, तो वहां मस्जिद की जगह केवल मलबा पड़ा मिला। इसके बाद प्रशासन ने करीब तीन घंटे की मशक्कत कर पूरे इलाके से मलबा हटवाया। तहसीलदार ने इसे कानून का सम्मान बताते हुए कहा कि लोगों ने खुद अवैध निर्माण हटाकर सही कदम उठाया है।
हाजीपुर गांव में ही मस्जिद से कुछ दूरी पर लगभग 1500 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने एक मदरसे पर भी प्रशासन का बुलडोजर चला। जिला प्रशासन के अनुसार यह मदरसा शिक्षा के नाम पर नहीं, बल्कि अवैध कब्जे और कमाई का जरिया बन चुका था। जांच में सामने आया कि मदरसे की आड़ में कई दुकानें बनाई गई थीं और उनसे किराया वसूला जा रहा था। इसके बाद प्रशासन ने बिना किसी देरी के तीन बुलडोजरों की मदद से पूरे मदरसे को जमींदोज कर दिया।
इसी क्रम में हाजीपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर राया बुजुर्ग गांव में भी सरकारी जमीन पर बनी एक अवैध मस्जिद को दो बुलडोजरों की मदद से ध्वस्त किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इन सभी मामलों में कार्रवाई अचानक नहीं की गई, बल्कि तहसीलदार कोर्ट से काफी पहले ही ध्वस्तीकरण के आदेश जारी हो चुके थे। मस्जिद और मदरसा कमेटियों ने इन आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद प्रशासन ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए यह सख्त कदम उठाया।
जिला अधिकारी राजेंद्र पेंसिया के अनुसार अवैध अतिक्रमण के इन मामलों में कुल 58 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसमें अकेले मस्जिद के मुतवल्ली पर 8.78 लाख रुपये का भारी जुर्माना शामिल है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माने की वसूली की प्रक्रिया भी सख्ती से अमल में लाई जाएगी और इसमें किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
कार्रवाई के तुरंत बाद प्रशासन ने यह संदेश भी दिया कि खाली कराई गई सरकारी जमीन अब अतिक्रमणकारियों के हाथ में नहीं जाएगी। डीएम और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने मौके पर ही 20 चयनित पात्र लाभार्थियों को उस जमीन के पट्टे सौंप दिए, जहां से अवैध कब्जा हटाया गया था। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा और कानून-व्यवस्था पर पूरी नजर रखी गई।
संभल प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ एक बड़े और निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा और आगे भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने साफ संदेश दे दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सरकारी जमीन पर कब्जे की कीमत अब भारी पड़ेगी।










