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भाजपा में बढ़ती नाराजगी के बीच योगी का सियासी दांव!

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कार्यकर्ताओं को साधकर 2027 की राह साफ करने की रणनीति

नई दिल्ली, 11 मार्च (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों अंदरखाने बड़ा मंथन चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं में बढ़ती नाराजगी और संगठनात्मक पदों पर लंबित नियुक्तियों ने पार्टी की सियासत को असहज बना दिया है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने हालात को संभालने के लिए सीधा मोर्चा संभाल लिया है और कार्यकर्ताओं से प्रत्यक्ष संवाद की रणनीति अपनाई है।

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प्रदेश में नगर निगमों, बोर्डों और आयोगों में सैकड़ों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्थिति यह है कि राज्य के 16 नगर निगमों में 10-10 मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति तक तीन साल से अटकी हुई है। इसी तरह विभिन्न सरकारी बोर्डों और आयोगों में भी 100 से अधिक पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। इससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी पैदा हो गई है।

भाजपा के भीतर यह असंतोष इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि लगातार चुनावी मेहनत के बावजूद उन्हें संगठन या सरकार में स्थान नहीं मिल रहा। कई जिलों में तो नाराजगी इतनी बढ़ गई कि सामूहिक इस्तीफों तक की खबरें सामने आईं।

दरअसल इस देरी के पीछे सबसे बड़ा कारण जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का गणित माना जा रहा है। भाजपा के भीतर ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति के कारण पार्टी के पारंपरिक समर्थक वर्ग—ब्राह्मण और राजपूत—के बीच असंतोष की चर्चा तेज हुई है। यही कारण है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर समीकरण साधने की कोशिशें चल रही हैं।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश नेतृत्व के बीच रणनीतिक मतभेदों ने भी कई फैसलों को धीमा कर दिया। माना जा रहा है कि गृहमंत्री Amit Shah और प्रदेश नेतृत्व के बीच संगठनात्मक संतुलन को लेकर मंथन जारी है, जिसके चलते कई नियुक्तियां अभी तक अटकी हुई हैं।

इन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब सीधे कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचने का फैसला किया है। मार्च 2026 से गोरखपुर, कानपुर और अन्य क्षेत्रों में समन्वय बैठकों का सिलसिला तेज हुआ है। इन बैठकों में कार्यकर्ताओं की शिकायतें सुनी जा रही हैं और अधिकारियों के रवैये से लेकर संगठनात्मक उपेक्षा तक के मुद्दों पर खुलकर चर्चा हो रही है।

मुख्यमंत्री ने अब तक 200 से अधिक विधायकों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर पार्टी के भीतर की नाराजगी को समझने की कोशिश की है। इन बैठकों में साफ संदेश दिया गया है कि कार्यकर्ता ही पार्टी की असली ताकत हैं और उनकी उपेक्षा किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

इसी के साथ आरएसएस और भाजपा के बीच समन्वय बैठकों का दौर भी तेज हो गया है। संघ प्रमुख Mohan Bhagwat से हुई मुलाकातों के बाद संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। कानपुर और गोरखपुर में हुई बैठकों में कार्यकर्ता सम्मान, संगठनात्मक अनुशासन और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा अभियान दरअसल मिशन-2027 की तैयारी का हिस्सा है। होली के बाद प्रदेश भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जिलाध्यक्षों और क्षेत्रीय अध्यक्षों में फेरबदल के साथ-साथ खाली सरकारी पदों पर भी कार्यकर्ताओं को समायोजित करने की योजना बनाई जा रही है।

इसके साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए नए अभियान शुरू किए गए हैं। कार्यकर्ताओं को डिजिटल प्रशिक्षण देने, मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाने और एसआईआर फॉर्म भरवाने जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्हें सक्रिय किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बूथ स्तर पर संगठन मजबूत रहेगा तो चुनावी लड़ाई आसान हो जाएगी।

हालांकि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए यूजीसी नियमों को लेकर भी प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हुई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने सामाजिक समीकरणों को प्रभावित किया है और इससे सवर्ण वर्ग की नाराजगी बढ़ने की चर्चा भी सामने आई है।

इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह संगठन और कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश शुरू की है, उसे एक बड़ा सियासी दांव माना जा रहा है। अगर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को समय रहते शांत कर लिया गया और सामाजिक संतुलन साध लिया गया, तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत हो सकती है।

लेकिन यह भी सच है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति बेहद जटिल है। यहां जातीय समीकरण, संगठन की मजबूती और स्थानीय मुद्दे किसी भी चुनाव का रुख बदल सकते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में भाजपा के भीतर होने वाले संगठनात्मक फैसले ही यह तय करेंगे कि मिशन-2027 कितना सफल होता है।

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