जनेऊ का हमारे धर्म शास्त्रों में विशेष महत्व है। जनेऊ तो लोग धारण करते हैं, लेकिन कैसे इसे उतारा जाए और कैसे धारण किया जाए? इसे लेकर अनभिज्ञता रहती है। आइये, हम अपने लेख में इसे धारण करने व उतारने के सामान्य मंत्र के बारे में जानते हैं, ताकि लोग मंत्रों का उपयोग कर लाभांवित हो सके।सनातन धर्म में यज्ञोपवीत को केवल एक धागा नहीं, बल्कि संस्कार, संयम और ज्ञान का प्रतीक माना गया है। इसे धारण करने वाला व्यक्ति द्विज कहलाता है — अर्थात दूसरा जन्म, जो गुरु द्वारा ज्ञान देने से होता है।
यज्ञोपवीत यानी जनेऊ धारण करने का मंत्र
ऊॅँ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रम् प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्रयं प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीत बलमस्तु तेज:।।
जीर्ण यज्ञोपवीत उतारने का मंत्र
एतावद्दिनपर्यन्तं ब्रह्मत्वं धारितं मया।
जीर्णत्वाच्च परित्यागो गच्छ सूत्र यथा सुखम्।
1️⃣ मनुस्मृति
मनुस्मृति (2.36) में कहा गया है—
जन्मना जायते शूद्रः संस्काराद् द्विज उच्यते।
वेदपाठाद् भवेत् विप्रः ब्रह्म जानातीति ब्राह्मणः॥
📖 अर्थ :
मनुष्य जन्म से शूद्र होता है, संस्कार (यज्ञोपवीत) से द्विज कहलाता है, वेद अध्ययन से विप्र और ब्रह्मज्ञान से ब्राह्मण बनता है।
2️⃣ याज्ञवल्क्य स्मृति
याज्ञवल्क्य स्मृति (1.3)—
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं
प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुंच शुभ्रं
यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
📖 अर्थ :
यज्ञोपवीत अत्यंत पवित्र, आयु, बल और तेज प्रदान करने वाला है।
3️⃣ शंख स्मृति
यज्ञोपवीतं विना विप्रो न पूज्यः कर्मसु क्वचित्।
📖 अर्थ :
यज्ञोपवीत के बिना ब्राह्मण किसी भी वैदिक कर्म का अधिकारी नहीं होता।
🧵 यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने का सामान्य मंत्र
जनेऊ धारण करते समय यह मंत्र बोला जाता है—
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं
प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुंच शुभ्रं
यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
📿 विधि संक्षेप :
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स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
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जनेऊ को दाहिने हाथ में लें
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मंत्र पढ़ते हुए बाएं कंधे पर धारण करें
🔁 जनेऊ उतारने (परिवर्तन) का सामान्य मंत्र
पुराना जनेऊ उतारते समय यह मंत्र पढ़ें—
उपवीतं भिन्नसूत्रं जीर्णं कश्मलदूषितम्।
विसृजामि पुनर्ब्रह्मन् वर्चो दीर्घायुरस्तु मे॥
📖 अर्थ :
हे ब्रह्मन्! यह जीर्ण-शीर्ण यज्ञोपवीत मैं त्यागता हूँ, मुझे दीर्घायु, तेज और पवित्रता प्रदान करें।
📌 नोट :
उतारा गया जनेऊ जल में प्रवाहित करें या पीपल/बरगद के नीचे रखें।
🌼 जनेऊ धारण का आध्यात्मिक भाव
जनेऊ की तीन धाराएँ दर्शाती हैं—
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ऋषि ऋण
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देव ऋण
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पितृ ऋण
यह व्यक्ति को संयम, ब्रह्मचर्य, सत्य और धर्म का स्मरण कराता है।
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