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बच्चों का सर्दी से बचाव, गौर वर्ण संतान दे और शक्तिवर्धक भी

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बच्चों का सर्दी से बचाव, गौर वर्ण संतान दे और शक्तिवर्धक भी

बच्चों का सर्दी से बचाव, गौर वर्ण संतान दे और शक्तिवर्धक भी

बच्चों का सर्दी से बचाव – बच्चों को नियमित रूप से मीठी नारंगी का रस पिलाते रहने से सर्दी की ऋतु की कोई भी बीमारी नहीं होगी। दूध पीते बच्चों के लिए यह लाभदायक है। इससे शक्ति भी बढ़ती है।

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गौर वर्ण संतान- पूरे गर्भकाल में गर्भवती स्त्री को नित्य दो नारंगी दोपहर में खाने या रस निकालकर पीने के लिए दें। इससे होने वाला शिशु गौर वर्ण, सुन्दर एवं स्वस्थ होगा।

गर्भावस्था में उल्टी , दस्त , खट्टी डकारें आने पर नारंगी के एक कप रस में स्वादानुसार मिश्री मिलाकर हर दो घण्टे से बार – बार पीने से लाभ होता है। अम्लपित्त में नारंगी के रस में भुना, पिसा, जीरा और सेंधा नमक डालकर पीने से लाभ होता है।

बच्चों का पौष्टिक भोजन – बच्चे को जितना दूध पिलायें उसमें उस दूध का एक हिस्सा मीठी नारंगी का रस मिलाकर पिलायें यह बच्चों का पौष्टिक पेय है। इससे शरीर का वजन तथा कद भी बढ़ता है।

शिशु शक्तिवर्धक- बच्चों को नारंगी का रस पिलाते रहने से वे थोड़े ही समय में स्वस्थ्य हो जाते हैं तथा उनका पोषण द्रुतगति से होता है। हड्डियों की कमजोरी और टेढ़ापन दूर हो जाता है तथा हड्डियाँ मजबूत हो जाती हैं। बच्चे शीघ्र चलने – फिरने लगते हैं। डिब्बे या गाय का दूध बोतल से पीने वाले बच्चों को नारंगी का रस निरन्तर पिलाना आवश्यक है। इसके रस से सूखा रोग ग्रस्त बच्चे मोटे ताजे हो जाते हैं। इसका रस आँतों की गति को तेज करता है। शिशु अधिकतर दूध पर ही निर्भर रहते हैं। दूध में विटामिन ‘ बी ‘ कॉम्पलेक्स नहीं होता है। शिशुओं को नारंगी खिलाकर इसकी पूर्ति की जा सकती है।

शक्तिवर्धक – ( 1 ) दुर्बल व्यक्ति एक गिलास नारंगी का रस सुबह, एक दोपहर में नित्य कुछ सप्ताह पीते रहें तो शरीर में ताकत आ जाती है।

( 2 ) नारंगी स्नायु मण्डल को उद्दीप्त करती है, जिससे कब्ज दूर होती है। स्नायु रोगों से पीड़ित एवं स्नायु तनावग्रस्त रोगियों के लिए नारंगी लाभदायक है। मदिरापान छुड़ाना – नाश्ते से पहले नारंगी खाने से मंदिरापान की इच्छा घटती है।

पायोरिया में नित्य नारंगी खाने से लाभ होता है। नारंगी के छिलकों को छाया में पीस लें। इससे नित्य मञ्जन करें।

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