भगवान भव रुद्र से हनुमान अवतार तक

सनातन परंपरा में भगवान शिव केवल संहार के देवता ही नहीं, बल्कि योग, ज्ञान, वैराग्य और आत्मकल्याण के आदि गुरु भी माने गए हैं। भगवान रुद्र के ग्यारहवें स्वरूप ‘भव’ को जगद्गुरु और योगाचार्य के रूप में विशेष महत्त्व प्राप्त है। शैवागम, लिंगपुराण और शिवपुराण की परंपराओं में उनके ज्ञानोपदेश, योग-मार्ग की स्थापना और शिष्यों … Continue reading भगवान भव रुद्र से हनुमान अवतार तक