श्रीकृष्ण ने क्यों की थी इस उग्र महाविद्या की साधना?
सनातन धर्म में मां शक्ति के अनेक रूप पूजे जाते हैं, लेकिन दस महाविद्याओं में जिन देवी स्वरूपों को अत्यंत रहस्यमय और शक्तिशाली माना गया है, उनमें मां बगलामुखी का स्थान विशिष्ट और विलक्षण है। उन्हें अष्टम महाविद्या कहा गया है। मां बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी माना जाता है—अर्थात ऐसी शक्ति, जो शत्रु की वाणी, बुद्धि, विचार और कर्म—सभी को रोक सकती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक, राजा-महाराजा, योद्धा, राजनेता, साधक और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग विशेष परिस्थितियों में मां बगलामुखी की साधना करते आए हैं।
मां बगलामुखी केवल एक देवी नहीं, बल्कि विजय, सुरक्षा और धर्म की रक्षा की साक्षात शक्ति हैं।
जैसे श्रीकृष्ण ने अधर्म के नाश के लिए उनकी साधना की, वैसे ही आज भी श्रद्धा और नियम से किया गया उनका पूजन साधक के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा को समाप्त कर सकता है।
महाभारत और मां बगलामुखी: विजय के पीछे छिपा दिव्य रहस्य
पौराणिक ग्रंथों और तांत्रिक परंपराओं में उल्लेख मिलता है कि महाभारत युद्ध से ठीक पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के साथ मां बगलामुखी की साधना की थी।
इस साधना का उद्देश्य केवल युद्ध जीतना नहीं था, बल्कि—
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अधर्म की शक्ति को स्तंभित करना
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कौरवों की बुद्धि को भ्रमित करना
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दुर्योधन और शकुनि जैसी कुटिल शक्तियों की योजनाओं को निष्फल करना
मान्यता है कि मां बगलामुखी की कृपा से ही युद्ध के कई निर्णायक क्षणों में कौरव पक्ष की रणनीतियां विफल हुईं और धर्म की विजय सुनिश्चित हुई।
क्यों कहलाती हैं मां बगलामुखी ‘शत्रु-विनाशिनी’?
मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है। उनका स्वरूप उग्र है, लेकिन उनकी कृपा साधक के लिए अत्यंत रक्षक होती है।
उनकी साधना से—
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शत्रु की वाणी निष्प्रभावी हो जाती है
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विरोधी की सोच और निर्णय शक्ति कमजोर पड़ जाती है
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षड्यंत्र, तंत्र-मंत्र और नकारात्मक ऊर्जा स्वतः शांत हो जाती है
इसी कारण उन्हें तांत्रिक साधना की सबसे प्रभावी देवी माना गया है।
मां बगलामुखी की पूजा विधि (विस्तृत विधि)
मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का अत्यंत विशेष महत्व है, क्योंकि पीला रंग ज्ञान, स्थिरता और स्तंभन शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
पूजा से पहले आवश्यक नियम
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प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
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पीले रंग के वस्त्र पहनें
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मन, वचन और कर्म से सात्विक रहें
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ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें
पूजा की विधि
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पीले आसन पर बैठकर मां बगलामुखी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें
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पीले पुष्प, पीले फल, हल्दी, चने की दाल अर्पित करें
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मां को हल्दी से तिलक करें
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सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं
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संभव हो तो हल्दी की माला अर्पित करें
श्रद्धा और नियम से की गई पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती है।
मां बगलामुखी का सिद्ध मंत्र (गुप्त और प्रभावशाली मंत्र)
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय
जिह्वां कीलय कीलय
बुद्धिं नाशय
ह्लीं ॐ स्वाहा॥
इस मंत्र का जाप विशेष रूप से—
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मंगलवार,
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गुरुवार,
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या नवरात्रि के समय
अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
मां बगलामुखी मंत्र जाप के चमत्कारी लाभ
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शत्रुओं से रक्षा और पूर्ण विजय
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कोर्ट-कचहरी, मुकदमे और विवादों में सफलता
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भय, तनाव और मानसिक अशांति का नाश
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आत्मविश्वास, साहस और निर्णय शक्ति में वृद्धि
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समाज और कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान
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आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक बल की प्राप्ति
कलियुग में मां बगलामुखी की साधना क्यों है विशेष?
धार्मिक मान्यता है कि कलियुग में जब छल, कपट और षड्यंत्र अधिक होते हैं, तब मां बगलामुखी की साधना सबसे तेज फल देने वाली मानी जाती है।
यही कारण है कि आज भी कई शक्तिपीठों—जैसे दतिया (मध्य प्रदेश)—में मां बगलामुखी की विशेष उपासना की जाती है।
अनुरोध व चेतावनी- मंत्र अगर सिद्ध करना चाहते हैं तो किसी योग्य और पात्र गुरु के मार्गदर्शन सिद्धी प्राप्त करना श्रेयस्कर होता है।










